नववर्ष पर सेवा का संकल्प, 86 वर्ष की उम्र में भी समाज के लिए प्रेरणा बने पूर्व कैप्टन यमुना सिंह
जब अधिकतर लोग जन्मदिन को दिखावे और औपचारिकता के साथ मनाते हैं, ऐसे दौर में असम रेजिमेंट के पूर्व कैप्टन यमुना सिंह ने नववर्ष और अपने 86वें जन्मदिन को सेवा, संवेदना और सामाजिक दायित्व का प्रतीक बना दिया। उन्होंने यह संदेश दिया कि असली खुशी केक काटने में नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद जगाने में है।
-- जन्मदिन को उत्सव नहीं, जिम्मेदारी बनाया; शिक्षा के जरिए बदली बच्चों की मुस्कान
केटी न्यूज/चौसा
जब अधिकतर लोग जन्मदिन को दिखावे और औपचारिकता के साथ मनाते हैं, ऐसे दौर में असम रेजिमेंट के पूर्व कैप्टन यमुना सिंह ने नववर्ष और अपने 86वें जन्मदिन को सेवा, संवेदना और सामाजिक दायित्व का प्रतीक बना दिया। उन्होंने यह संदेश दिया कि असली खुशी केक काटने में नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद जगाने में है।नववर्ष के मौके पर पूर्व कैप्टन यमुना सिंह ने अपने परिजनों के साथ सादगीपूर्ण ढंग से जन्मदिन मनाया। इसके बाद उन्होंने गरीब एवं कमजोर वर्ग के बच्चों के बीच कॉपी, कलम, पुस्तक और टॉफी का वितरण किया। बच्चों को जब शिक्षण सामग्री मिली तो उनके चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास साफ नजर आया। यह दृश्य सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के लिए एक मजबूत संदेश था।

-- शिक्षा को बताया सबसे बड़ा हथियार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व कैप्टन यमुना सिंह ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो बच्चों को अंधकार से निकालकर उजाले की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सबसे बड़ा सुख जरूरतमंदों की मदद करने से मिलता है। यदि हम अपने संसाधनों का थोड़ा सा हिस्सा भी समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों पर खर्च करें, तो आने वाला कल बेहतर बन सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि वे हर वर्ष अपना जन्मदिन इसी तरह सेवा कार्यों के साथ मनाते हैं, ताकि समाज में सकारात्मक सोच और संवेदनशीलता का संदेश जा सके।

-- गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर विनोद कुमार सिंह, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि शैलेश सिंह, सुमन देवी, देवंती देवी, उषा देवी, गंगा सागर सिंह, अभय नारायण सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने पूर्व कैप्टन के दीर्घायु होने की कामना की और उनके सामाजिक योगदान को अनुकरणीय बताया।86 वर्ष की उम्र में भी पूर्व कैप्टन यमुना सिंह का यह सेवा भाव यह साबित करता है कि समाज के लिए कुछ करने की कोई उम्र नहीं होती। उनका यह कदम न सिर्फ बच्चों के भविष्य में निवेश है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरक उदाहरण भी है।

