कंबोडिया में फंसे बक्सर के दो युवकों को छुड़ाने की डीएम से गुहार

रोजगार के सपने दिखाकर विदेश भेजे गए बक्सर जिले के दो युवक अब कथित तौर पर कंबोडिया में फंस गए हैं। परिजनों का आरोप है कि नौकरी दिलाने के नाम पर उन्हें टूरिस्ट वीजा पर बाहर भेजा गया, जहां पहुंचने के बाद उनसे साइबर ठगी से जुड़े गिरोह में काम कराने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर उनके पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज छीन लिए गए तथा उन्हें बंधक जैसी स्थिति में रखा गया। पिछले करीब 25 दिनों से दोनों युवकों से परिवार का सीधा संपर्क नहीं हो पाया है। इस गंभीर मामले को लेकर परिजन सोमवार को समाहरणालय पहुंचे और जिलाधिकारी साहिला से हस्तक्षेप की गुहार लगाई।

कंबोडिया में फंसे बक्सर के दो युवकों को छुड़ाने की डीएम से गुहार

-- टूरिस्ट वीजा पर विदेश भेजे जाने का आरोप, परिजनों का दावा पासपोर्ट जब्त कर ठगी गिरोह में काम का दबाव, 25 दिनों से संपर्क टूटा, डीएम से लगाई मदद की पुकार

केटी न्यूज/डुमरांव

रोजगार के सपने दिखाकर विदेश भेजे गए बक्सर जिले के दो युवक अब कथित तौर पर कंबोडिया में फंस गए हैं। परिजनों का आरोप है कि नौकरी दिलाने के नाम पर उन्हें टूरिस्ट वीजा पर बाहर भेजा गया, जहां पहुंचने के बाद उनसे साइबर ठगी से जुड़े गिरोह में काम कराने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर उनके पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज छीन लिए गए तथा उन्हें बंधक जैसी स्थिति में रखा गया। पिछले करीब 25 दिनों से दोनों युवकों से परिवार का सीधा संपर्क नहीं हो पाया है। इस गंभीर मामले को लेकर परिजन सोमवार को समाहरणालय पहुंचे और जिलाधिकारी साहिला से हस्तक्षेप की गुहार लगाई।

फंसे हुए युवकों में कोरानसराय थाना क्षेत्र के कोरानसराय निवासी सुखदेव सिंह के पुत्र गोविंद सिंह और सोनवर्षा थाना क्षेत्र के कड़सर गांव निवासी कृष्णानंद चौधरी के पुत्र विनोद कुमार चौधरी शामिल हैं। डीएम को सौंपे गए आवेदन में गोविंद सिंह की पत्नी निभा देवी, मां विमला देवी, भाई अखिलेश कुमार सिंह के साथ-साथ विनोद चौधरी की पत्नी मुनि देवी और बेटा रोहित कुमार ने दोनों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराने की मांग की।परिजनों ने बताया कि वे पहले ही स्थानीय विधायक, सांसद और विदेश मंत्रालय से मदद की अपील कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। ऐसे में जिला प्रशासन से उम्मीद बांधते हुए उन्होंने डीएम से तत्काल स्तर पर कार्रवाई कराने की मांग की।

जिलाधिकारी ने मामले में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है।जानकारी के अनुसार, गोविंद सिंह तीन जनवरी 2026 को रोजगार के सिलसिले में कंबोडिया गए थे। उनके साथ विनोद कुमार चौधरी भी गया था। परिवार का आरोप है कि महाराष्ट्र के संतोष चौपगार उर्फ लक्की नामक एक दलाल ने होटल में फूड पैकिंग या वेटर की नौकरी दिलाने तथा 75 से 80 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर दोनों को विदेश भेजा। लेकिन कंबोडिया पहुंचते ही पूरा मामला उलट गया।गोविंद के भाई अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि 19 फरवरी को एक पाकिस्तानी नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने कहा कि गोविंद अपने साथियों के साथ वहां की जेल में बंद है।

पहले दो लाख रुपये की मांग की गई, बाद में रकम बढ़ाकर छह लाख रुपये कर दी गई। परिजनों के मुताबिक, बीच-बीच में वॉइस मैसेज के जरिए भी पैसे की मांग की जा रही है, जिससे परिवार दहशत में है।इस घटना ने दोनों परिवारों को तोड़कर रख दिया है। गोविंद सिंह की मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि विनोद चौधरी के घर भी बेचैनी और अनिश्चितता का माहौल है। परिजनों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस मानव तस्करी और साइबर गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कराते हुए दोनों युवकों समेत अन्य फंसे भारतीयों को भी जल्द सुरक्षित स्वदेश लाया जाए।