होल्डिंग टैक्स पर डुमरांव में उबाल: चार घंटे चली बैठक में टकराव, फिर भी नहीं निकला समाधान

नगर परिषद डुमरांव में होल्डिंग टैक्स को लेकर बढ़ता विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। सोमवार को इस मुद्दे पर बुलाई गई बैठक भारी हंगामे के बीच शुरू हुई और करीब चार घंटे तक चली, लेकिन इसके बावजूद ठोस समाधान नहीं निकल सका। बैठक में एक तरफ नगर परिषद अपने नियमों और प्रक्रियाओं को सही ठहराने में जुटी रही, तो दूसरी ओर वार्ड पार्षदों और नागरिकों ने टैक्स निर्धारण में भारी गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

होल्डिंग टैक्स पर डुमरांव में उबाल: चार घंटे चली बैठक में टकराव, फिर भी नहीं निकला समाधान

__ नगर परिषद के जवाबों से असंतुष्ट सामाजिक मंच, टैक्स नीति के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान

केटी न्यूज/डुमरांव

नगर परिषद डुमरांव में होल्डिंग टैक्स को लेकर बढ़ता विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। सोमवार को इस मुद्दे पर बुलाई गई बैठक भारी हंगामे के बीच शुरू हुई और करीब चार घंटे तक चली, लेकिन इसके बावजूद ठोस समाधान नहीं निकल सका। बैठक में एक तरफ नगर परिषद अपने नियमों और प्रक्रियाओं को सही ठहराने में जुटी रही, तो दूसरी ओर वार्ड पार्षदों और नागरिकों ने टैक्स निर्धारण में भारी गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।बैठक की शुरुआत होते ही माहौल गर्म हो गया। सामाजिक मंच के संयोजक प्रदीप शरण द्वारा पहले से उठाए गए सवालों पर जवाब देने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी, लेकिन जैसे ही चर्चा शुरू हुई, पार्षदों और नागरिकों ने एक स्वर में टैक्स की दर, वर्गीकरण और पारदर्शिता को लेकर सवालों की झड़ी लगा दी।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कुछ समय के लिए बैठक बाधित करनी पड़ी।हालांकि बाद में आपसी समझदारी से बैठक फिर शुरू हुई, लेकिन बहस का तीखापन कम नहीं हुआ। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी राहुलधर दूबे ने साफ तौर पर कहा कि होल्डिंग टैक्स की वसूली पूरी तरह से सरकारी नियमों के तहत की जा रही है और इसमें किसी प्रकार की मनमानी नहीं है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सामाजिक मंच द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं पर विस्तृत और लिखित जवाब दिया जाएगा।लेकिन परिषद के इस आश्वासन से लोग संतुष्ट नजर नहीं आए। सामाजिक मंच ने वर्ष 2017 से अब तक के डिमांड रजिस्टर को सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

इस मुद्दे पर बैठक में लंबी बहस हुई, जिसमें पारदर्शिता की कमी को लेकर नगर परिषद को घेरा गया।वहीं स्वच्छता पदाधिकारी राजीव कुमार ने जानकारी दी कि 31 मार्च तक बिना विलंब शुल्क के होल्डिंग टैक्स जमा करने की सुविधा दी गई है, ताकि लोग राहत महसूस कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि तय समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी, जिससे लोगों में और असंतोष देखने को मिला।बैठक में नागरिकों ने सड़कों के वर्गीकरण को लेकर भी बड़ा मुद्दा उठाया। उनका आरोप था कि मुख्य सड़क, संपर्क सड़क और गलियों के वर्गीकरण में भारी गड़बड़ी की गई है, जिसके कारण गलत तरीके से टैक्स लगाया जा रहा है। लोगों ने मांग की कि पहले वर्गीकरण को सही किया जाए, उसके बाद ही टैक्स वसूली की जाए।

स्थिति को संभालने के लिए कार्यवाहक चेयरमैन ने एक अलग पहल की। उन्होंने विस्तारित क्षेत्र के वार्ड 1 से 16 तक के प्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ अलग बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा करने और टैक्स निर्धारण पर पुनर्विचार करने का आश्वासन दिया। हालांकि यह आश्वासन भी तत्काल समाधान के रूप में लोगों को संतुष्ट नहीं कर सका।बैठक में रामबहादुर सिंह, माले नेता संजय राय, अखिलेश केशरी, शिक्षक सुदामा सिंह समेत कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और पारदर्शिता की मांग की।

बैठक के बाद सामाजिक मंच के संयोजक प्रदीप शरण ने साफ कहा कि उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक नगर परिषद टैक्स निर्धारण में पारदर्शिता नहीं लाती और जनता की आपत्तियों का समाधान नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।कुल मिलाकर यह बैठक विवाद को सुलझाने के बजाय और गहरा कर गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर परिषद अपने वादों पर कितना अमल करती है या फिर यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़े जन आंदोलन का रूप लेता है।