सरकारी जमीन पर निजी दावे की ‘जंग’, डिग्री कॉलेज का निर्माण अधर में
ब्रह्मपुर प्रखंड के पोखरहा पंचायत में प्रस्तावित राजकीय डिग्री कॉलेज का सपना जमीन विवाद के फेर में उलझ गया है। कॉलेज भवन के लिए चिन्हित करीब 5 एकड़ 48 डिसमिल सरकारी भूमि पर कुछ लोगों के निजी दावे ने निर्माण की राह रोक दी है। खास बात यह है कि जिस जमीन पर निजी मिल्कियत का दावा किया जा रहा है, उससे जुड़े राजस्व एवं न्यायिक मामलों में संबंधित पक्ष को अब तक राहत नहीं मिली है।

__ 5 एकड़ 48 डिसमिल भूमि पर कॉलेज के लिए हो चुकी है ग्रामसभा की मंजूरी और एनओसी, जमाबंदी रद्द होने के बाद भी खेत में हुई धान की रोपाई; प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर।
ब्रह्मपुर प्रखंड के पोखरहा पंचायत में प्रस्तावित राजकीय डिग्री कॉलेज का सपना जमीन विवाद के फेर में उलझ गया है। कॉलेज भवन के लिए चिन्हित करीब 5 एकड़ 48 डिसमिल सरकारी भूमि पर कुछ लोगों के निजी दावे ने निर्माण की राह रोक दी है। खास बात यह है कि जिस जमीन पर निजी मिल्कियत का दावा किया जा रहा है, उससे जुड़े राजस्व एवं न्यायिक मामलों में संबंधित पक्ष को अब तक राहत नहीं मिली है। इसके बावजूद कथित दावेदारों द्वारा इस वर्ष भी जमीन पर धान की रोपाई किए जाने से विवाद के फिर गहराने की आशंका बढ़ गई है।राजपुर मौजा में ब्रह्मपुर-बगेन मुख्य मार्ग के किनारे स्थित उक्त सरकारी भूमि को राजकीय डिग्री कॉलेज के निर्माण के लिए चिह्नित किया गया है। पंचायत की ग्रामसभा में कॉलेज निर्माण के पक्ष में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हो चुका है।

संबंधित विभाग को अनापत्ति प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया जा चुका है। विभागीय अभियंताओं ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी जितेंद्र कुमार, मुखिया भगवान सिंह और समाजसेवी कमलेश यादव की मौजूदगी में स्थल निरीक्षण कर निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द ही कॉलेज भवन का निर्माण शुरू होगा।लेकिन, निर्माण शुरू होने से पहले ही राजपुर गांव के कुछ लोगों ने जमीन पर अपना दावा जताते हुए आपत्ति दर्ज करा दी। उनका कहना है कि वे वर्षों से इस भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। उनके नाम से वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक लगान जमा होने और राजस्व रसीद निर्गत होने का भी दावा किया जा रहा है। इसी आधार पर वे जमीन पर अपना अधिकार बता रहे हैं।

__ न्यायिक प्रक्रिया में नहीं टिक पाया दावा
हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार भूमि की जमाबंदी और स्वामित्व को लेकर चली राजस्व न्यायिक प्रक्रिया में संबंधित पक्ष को राहत नहीं मिली। दाखिल-खारिज अपील वाद संख्या 143/2022-23 में 4 सितंबर 2024 को पारित आदेश के खिलाफ 27 नवंबर 2024 को पुनरीक्षण वाद दायर किया गया था। सुनवाई के बाद भूमि सुधार उप समाहर्ता, डुमरांव ने पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए पुनरीक्षण वाद खारिज कर दिया।इसके अलावा जमाबंदी रद्दीकरण वाद संख्या 53/2023-24 में 27 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में संबंधित पक्ष की जमाबंदी को बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 9 के तहत निरस्त कर दिया गया। अंचल स्तर से मिली जानकारी के मुताबिक डीसीएलआर और एडीएम न्यायालय में भी संबंधित पक्ष को राहत नहीं मिली है।

__ धान की रोपाई से बढ़ी टकराव की आशंका
न्यायिक प्रक्रिया में दावेदारी को राहत नहीं मिलने के बावजूद इस वर्ष विवादित भूमि पर धान की रोपाई किए जाने से प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। अब यदि कॉलेज निर्माण के लिए प्रशासन जेसीबी या अन्य निर्माण संसाधनों के साथ जमीन पर पहुंचता है तो टकराव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
__ कॉलेज को लेकर ग्रामीणों में उम्मीद
इधर, पंचायत प्रतिनिधियों और समाजसेवियों का कहना है कि ब्रह्मपुर क्षेत्र में राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना लंबे समय से जरूरी महसूस की जा रही है। समाजसेवी कमलेश यादव, जगदीश प्रसाद और छोटे सिंह ने कहा कि कॉलेज बनने से आसपास के गांवों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा।ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन का चयन, ग्रामसभा की मंजूरी और एनओसी समेत जरूरी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं तथा संबंधित दावेदारी को न्यायिक स्तर पर भी राहत नहीं मिली है, तो निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी समझ से परे है। अब प्रशासन के सामने चुनौती विवाद को नियमानुसार समाप्त कर सरकारी भूमि को निर्माण के लिए सुरक्षित कराने और कॉलेज भवन का काम शुरू कराने की है।

