छोटे शहर के बड़े हौसले: डुमरांव के अक्षत ने नीट में हासिल की ऑल इंडिया 12,833वीं रैंक

डुमरांव के एक मध्यमवर्गीय परिवार के छात्र अक्षत कुमार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में ऑल इंडिया 12,833वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि सफलता के लिए बड़े शहर या महंगे कोचिंग संस्थान ही एकमात्र रास्ता नहीं हैं। डुमरांव में रहकर ऑनलाइन माध्यम से तैयारी करने वाले अक्षत ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

छोटे शहर के बड़े हौसले: डुमरांव के अक्षत ने नीट में हासिल की ऑल इंडिया 12,833वीं रैंक

__ ऑनलाइन पढ़ाई और आत्मअनुशासन के दम पर मिली सफलता, अब गरीबों के लिए कम लागत वाला अस्पताल खोलने का है सपना

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव के एक मध्यमवर्गीय परिवार के छात्र अक्षत कुमार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में ऑल इंडिया 12,833वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि सफलता के लिए बड़े शहर या महंगे कोचिंग संस्थान ही एकमात्र रास्ता नहीं हैं। डुमरांव में रहकर ऑनलाइन माध्यम से तैयारी करने वाले अक्षत ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। ओबीसी वर्ग में उनकी ऑल इंडिया रैंक 5,888 रही, जबकि उनका पर्सेंटाइल 99.3486 दर्ज किया गया।अक्षत की सफलता पूरे बक्सर जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी जैसे चुनौतीपूर्ण विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।अक्षत के पिता सुरेंद्र मेहरा मठिला स्थित एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां कुमारी अंजू गृहिणी हैं।

परिवार के सहयोग और प्रेरणा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए अक्षत कहते हैं कि माता-पिता ने हमेशा उन्हें मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी का महत्व सिखाया, जिसने उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने का आत्मविश्वास दिया।उनकी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई डुमरांव के कैम्ब्रिज स्कूल में हुई। अक्षत अपनी सफलता का श्रेय विद्यालय के शिक्षकों और प्रबंधन को भी देते हैं। इसके साथ ही वे डुमरांव के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश सिंह को अपनी प्रेरणा मानते हैं। उनका कहना है कि मरीजों के प्रति डॉ. सिंह की सेवा भावना और सहज व्यवहार ने उन्हें डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया।अक्षत का सपना सिर्फ एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करना नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसा अस्पताल स्थापित करना है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को कम खर्च में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके।

उनका मानना है कि चिकित्सा सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है।परिवार में अक्षत के अलावा एक भाई और एक बहन हैं। बहन वर्तमान में बीएड की पढ़ाई कर रही हैं। बेटे की उपलब्धि पर माता-पिता ने खुशी जताते हुए इसे वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम बताया।डुमरांव के इस युवा की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है, जो संसाधनों की कमी को अपनी मंजिल के बीच बाधा मान लेते हैं। अक्षत ने अपने प्रदर्शन से यह संदेश दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, आत्मविश्वास मजबूत हो और मेहनत निरंतर हो, तो छोटे शहर से भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।