हर-हर महादेव से गूंजा बक्सर, आस्था के सागर में डूबा जिला

“हर हर महादेव” और “ओम नमः शिवाय” के जयघोष से पूरा बक्सर जिला महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवमय हो उठा। अहले सुबह से ही श्रद्धालु गंगा स्नान कर गंगाजल लेकर शिवालयों की ओर बढ़ते दिखे। दोपहर बाद तक जिले के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्ति, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रशासनिक मुस्तैदी और सुव्यवस्थित प्रबंधन के बीच यह पर्व शांतिपूर्ण व श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।

हर-हर महादेव से गूंजा बक्सर, आस्था के सागर में डूबा जिला

-- महाशिवरात्रि पर शिवालयों में उमड़ा जनसैलाब, ब्रह्मपुर के बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

केटी न्यूज/बक्सर

“हर हर महादेव” और “ओम नमः शिवाय” के जयघोष से पूरा बक्सर जिला महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवमय हो उठा। अहले सुबह से ही श्रद्धालु गंगा स्नान कर गंगाजल लेकर शिवालयों की ओर बढ़ते दिखे। दोपहर बाद तक जिले के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्ति, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रशासनिक मुस्तैदी और सुव्यवस्थित प्रबंधन के बीच यह पर्व शांतिपूर्ण व श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र ब्रह्मपुर स्थित बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर बना, जहां अनुमानतः एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

-- महाशिवरात्रि का धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने इसी रात्रि में अपने कंठ में धारण किया था, जिससे उनका नाम ‘नीलकंठ’ पड़ा।शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन विधिवत व्रत, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण करने से भक्तों के समस्त पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। शिव पुराण में महाशिवरात्रि को अत्यंत फलदायी बताया गया है। इस दिन की गई उपासना सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी मानी जाती है।

-- ब्रह्मपुर में आस्था का महासंगम

महाशिवरात्रि की भोर होते ही ब्रह्मपुर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज के गांवों से लोग पैदल, साइकिल, बाइक और अन्य वाहनों से पहुंचे। प्रशासन द्वारा मंदिर के सभी निकास द्वारों पर ड्रॉप गेट बनाकर वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। मंदिर परिसर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कतारबद्ध किया गया था।एसपी शुभम आर्य स्वयं मौके पर पहुंचकर विधि-व्यवस्था का जायजा लेते दिखे। दंडाधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। महिला व पुरुष पुलिसकर्मी मंदिर परिसर के भीतर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था संभाले हुए थे।मंदिर पूजा समिति के सदस्य भी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से जलाभिषेक कराने और सुरक्षित निकास सुनिश्चित करने में जुटे रहे। दोपहर बाद तक श्रद्धालुओं की भीड़ कम नहीं हुई। ब्रह्मपुर की गलियां भक्तों से इस कदर भर गई थीं कि पैदल चलने तक की जगह नहीं बची थी, बावजूद इसके व्यवस्था प्रशंसनीय रही।

-- बक्सर मुख्यालय के शिवालयों में दिखा उल्लास

जिला मुख्यालय बक्सर में भी महाशिवरात्रि का उत्साह चरम पर रहा। गंगा स्नान के बाद भक्त गंगाजल लेकर शिवालयों की ओर बढ़ते दिखे। शहर के रामेश्वरनाथ शिव मंदिर, गौरीशंकर शिव मंदिर तथा नाथ बाबा शिवमंदिर समेत अन्य मंदिरों में हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया था। भक्तों ने बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया। कई श्रद्धालुओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा और रात्रि में शिव चालीसा एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया।

-- सोखाधाम में उमड़ा आस्था का सैलाब

इटाढ़ी प्रखंड के नेहालपुर स्थित प्रसिद्ध सोखाधाम में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मान्यता है कि महादेव के सेनापति वीरभद्र यहां सोखा बाबा के रूप में अवतरित हुए थे। यहां दूर-दराज से लोग अपने दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं।महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने धूप-दीप जलाकर और नारियल अर्पित कर मनोकामनाएं मांगीं।

-- डुमरांव का जंगलीनाथ शिवमंदिर बना आकर्षण का केंद्र

डुमरांव स्थित प्रसिद्ध जंगलीनाथ शिवमंदिर में भी दोपहर तक ‘जय शिव’ और ‘ओम नमः शिवाय’ की गूंज सुनाई देती रही। अनुमानतः दस हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा जंगलीनाथ का जलाभिषेक किया।मंदिर परिसर के अंदर और बाहर दंडाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था भी की गई थी।

-- महरौरा और कचइनिया में सजा पारंपरिक मेला

महाशिवरात्रि के अवसर पर डुमरांव के महरौरा तथा कचइनिया स्थित कंचनेश्वरधाम शिवमंदिर में पारंपरिक मेले का आयोजन किया गया। दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालु मेले में खरीदारी और झूलों का आनंद लेते नजर आए।इसके अतिरिक्त लंगटू महादेव मंदिर, पंच मंदिर, महाकाल मंदिर और मुगांव के मुंगेश्वरनाथ शिवमंदिर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के शिवालयों में भी दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा।

- पूरे वैदिक विधान से श्रद्धालुओं ने की महादेव की पूजा-अर्चना

महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक कर विशेष पूजा किए, इसे पंचामृत पूजन भी कहा जाता है। इसके बाद बेलपत्र, भांग, धतूरा और आक के फूल अर्पित किए जा रहे थे।रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग विधि से शिव की आराधना की जाती है। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।

-- भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम

इस बार महाशिवरात्रि पर बक्सर जिले में भक्ति के साथ अनुशासन का भी अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रशासनिक सतर्कता और मंदिर समितियों के सहयोग से श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।दिनभर गूंजते रहे ‘हर हर महादेव’ के जयघोष ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। आस्था, विश्वास और समर्पण का यह पर्व एक बार फिर जिलेवासियों के हृदय में नई उमंग और आध्यात्मिक चेतना का संचार कर गया।महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और सकारात्मक ऊर्जा से भरने वाला उत्सव बनकर सामने आया।