रूहानियत में डूबा चौसा: चांद के साथ शुरू हुआ इबादत और रहमत का महीना
बुधवार की शाम जैसे ही आसमान में चांद नजर आया, पूरे चौसा में रूहानी माहौल छा गया। चांद के दीदार के साथ ही मुकद्दस माह रमजान की शुरुआत हो गई और मुस्लिम समुदाय में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। मुस्लिम बहुल इलाकों में देर शाम तक लोगों ने एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी। सोशल मीडिया से लेकर मोहल्लों तक “रमजान मुबारक” की गूंज सुनाई देने लगी।
-- पहले रोजे के साथ गूंज उठीं मस्जिदें, तरावीह की नमाज से बढ़ी रौनक, दुआ, सब्र और नेकी के पैगाम के साथ रमजान का आगाज
केटी न्यूज/चौसा
बुधवार की शाम जैसे ही आसमान में चांद नजर आया, पूरे चौसा में रूहानी माहौल छा गया। चांद के दीदार के साथ ही मुकद्दस माह रमजान की शुरुआत हो गई और मुस्लिम समुदाय में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। मुस्लिम बहुल इलाकों में देर शाम तक लोगों ने एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी। सोशल मीडिया से लेकर मोहल्लों तक “रमजान मुबारक” की गूंज सुनाई देने लगी।चांद दिखते ही मस्जिदों की रौनक बढ़ गई। अकीदतमंद इबादत के लिए मस्जिदों का रुख करने लगे। खास तौर पर रमजान में अदा की जाने वाली तरावीह की नमाज का सिलसिला शुरू हो गया, जो पूरे महीने जारी रहेगा। गुरुवार को लोगों ने पहला रोजा रखा। सेहरी से लेकर इफ्तार तक पूरे दिन इबादत, सब्र और अल्लाह की याद में बिताया गया।

रमजान को इस्लाम में सबसे पाक और बरकत वाला महीना माना जाता है। यह महीना आत्मसंयम, त्याग और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। रोजा केवल भूख-प्यास से परहेज का नाम नहीं, बल्कि बुराइयों से दूर रहकर नेक रास्ते पर चलने की सीख भी देता है। इस दौरान लोग ज्यादा से ज्यादा इबादत, कुरान की तिलावत और दुआ में समय बिताते हैं।रमजान के साथ ही समाजसेवा और जरूरतमंदों की मदद की परंपरा भी तेज हो जाती है। सदका और जकात के जरिए गरीबों तक मदद पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो जाता है, ताकि समाज के हर वर्ग तक खुशियां पहुंच सकें। बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है। खजूर, फल और इफ्तार से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी में तेजी देखी जा रही है।

खानकाही मस्जिद के इमाम मौलाना मुख्तार अहमद रिजवी ने बताया कि रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है और हर अशरा दस दिनों का होता है। पहला अशरा रहमत और बरकत का माना जाता है, जिसमें अल्लाह अपने बंदों पर विशेष कृपा करता है। दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है, जबकि तीसरा और अंतिम अशरा जहन्नुम से निजात का माना जाता है।उन्होंने कहा कि रमजान आत्ममंथन का महीना है, जिसमें इंसान अपने भीतर झांककर खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। एक महीने की इबादत और सब्र के बाद ईद का त्योहार खुशियों और भाईचारे का संदेश लेकर आता है। फिलहाल पूरे चौसा में रमजान की रौनक और रूहानियत का खास माहौल देखने को मिल रहा है।

