लाखों की लागत से बने शहर के पहचान चिन्ह उपेक्षा के शिकार, रखरखाव पर उठे सवाल

नगर पंचायत क्षेत्र में शहर की पहचान को आकर्षक स्वरूप देने और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए प्रतीकात्मक साइन बोर्ड अब रखरखाव के अभाव में अपनी चमक खोते नजर आ रहे हैं।

लाखों की लागत से बने शहर के पहचान चिन्ह उपेक्षा के शिकार, रखरखाव पर उठे सवाल

__ कई स्थानों पर बंद पड़ी है प्रकाश व्यवस्था, गंदगी और अतिक्रमण से फीकी पड़ रही नगर की सुंदरता; लोगों ने नियमित देखरेख की उठाई मांग

केटी न्यूज/चौसा

नगर पंचायत क्षेत्र में शहर की पहचान को आकर्षक स्वरूप देने और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए प्रतीकात्मक साइन बोर्ड अब रखरखाव के अभाव में अपनी चमक खोते नजर आ रहे हैं। लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए ये बोर्ड शहर की सुंदरता बढ़ाने और स्थानीय पहचान को नई पहचान देने के लिए लगाए गए थे, लेकिन समय पर देखभाल नहीं होने से इनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।नगर पंचायत की ओर से दुर्गा मंदिर परिसर, अखौरीपुर गोला स्थित महावीर मंदिर तथा यादव मोड़ चौराहे के समीप आकर्षक डिजाइन वाले बोर्ड लगाए गए थे। शुरुआती दिनों में इन स्थलों पर लोगों की अच्छी-खासी आवाजाही रहती थी और बोर्ड आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। लेकिन वर्तमान में इनमें से अधिकांश स्थानों पर अव्यवस्था का आलम दिखाई दे रहा है।

दुर्गा मंदिर परिसर स्थित बोर्ड के आसपास अस्थायी दुकानों और खोमचों के कारण इसका सौंदर्य प्रभावित हो रहा है। वहीं यादव मोड़ के समीप लगे बोर्ड के आसपास नियमित रूप से कचरा जमा रहने से स्वच्छता अभियान की मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन स्थलों की नियमित सफाई और निगरानी की जाए तो यह शहर की सकारात्मक पहचान को और मजबूत कर सकते हैं।लोगों ने यह भी बताया कि बोर्डों में लगाई गई आकर्षक एलईडी प्रकाश व्यवस्था कुछ ही दिनों तक संचालित रही। इसके बाद अधिकांश लाइटें बंद हो गईं, जिससे रात के समय ये बोर्ड अपनी उपयोगिता और आकर्षण दोनों खो चुके हैं। अंधेरे में डूबे रहने के कारण इनकी सुंदरता भी प्रभावित हो रही है।

हालांकि अखौरीपुर गोला स्थित बोर्ड की स्थिति अन्य स्थानों की तुलना में बेहतर बताई जा रही है, लेकिन शेष दोनों स्थानों पर तत्काल मरम्मत और नियमित रखरखाव की जरूरत महसूस की जा रही है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सार्वजनिक धन से विकसित ऐसी परियोजनाओं का समय-समय पर रखरखाव किया जाए तो उनका उद्देश्य भी पूरा होगा और शहर की छवि भी बेहतर बनेगी।नगरवासियों ने नगर पंचायत प्रशासन से बंद पड़ी प्रकाश व्यवस्था को शीघ्र चालू कराने, बोर्डों के आसपास नियमित सफाई सुनिश्चित करने तथा अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इन प्रतीकात्मक स्थलों की समुचित देखभाल की जाए तो ये न केवल शहर की पहचान को मजबूती देंगे, बल्कि स्वच्छ और सुंदर चौसा की सकारात्मक तस्वीर भी प्रस्तुत करेंगे।