रामकथा में गूंजा जनकपुर का दिव्य प्रसंग, शिव धनुष भंग के साथ सजी सीता-राम विवाह की अलौकिक झांकी
प्रखंड के रामपुर गांव में आयोजित साप्ताहिक श्रीराम कथा महोत्सव का वातावरण शनिवार को भक्तिमय उल्लास से सराबोर रहा। महोत्सव के छठे दिन प्रसिद्ध कथावाचक मधुसूदन जी महाराज ने जनकपुर में आयोजित सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग, वरमाला एवं फूलवारी प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि पूरा कथा पंडाल "जय श्रीराम" और "सीताराम" के जयघोष से गूंज उठा।

__ रामपुर में श्रीराम कथा महोत्सव के छठे दिन श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे, आज पूर्णाहुति और महाप्रसाद के साथ होगा समापन
केटी न्यूज/केसठ।
प्रखंड के रामपुर गांव में आयोजित साप्ताहिक श्रीराम कथा महोत्सव का वातावरण शनिवार को भक्तिमय उल्लास से सराबोर रहा। महोत्सव के छठे दिन प्रसिद्ध कथावाचक मधुसूदन जी महाराज ने जनकपुर में आयोजित सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग, वरमाला एवं फूलवारी प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि पूरा कथा पंडाल "जय श्रीराम" और "सीताराम" के जयघोष से गूंज उठा। कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालु देर तक भक्ति रस में डूबे रहे।कथावाचक ने कहा कि राजा जनक द्वारा आयोजित धनुष यज्ञ केवल एक स्वयंवर नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और सत्य की विजय का प्रतीक था। उन्होंने बताया कि महर्षि विश्वामित्र भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुर पहुंचे, जहां दोनों राजकुमारों के तेजस्वी और दिव्य व्यक्तित्व ने जनकपुरवासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पर भगवान श्रीराम ने भगवान शिव के विशाल एवं अजेय धनुष को सहज भाव से उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया। उसी क्षण धनुष भंग हो गया और राजा जनक की वर्षों पुरानी प्रतिज्ञा पूर्ण हुई।मधुसूदन जी महाराज ने आगे कहा कि शिव धनुष भंग होते ही माता सीता ने प्रसन्न मन से भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपने जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। इस दिव्य प्रसंग का मार्मिक वर्णन सुन श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा पंडाल भक्ति एवं उत्साह से भर उठा।कथा के दौरान प्रस्तुत मधुर भजन, संगीतमय वादन और आध्यात्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को देर तक मंत्रमुग्ध बनाए रखा। बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्म और मर्यादा के संदेश को आत्मसात किया।

महोत्सव के व्यवस्थापक अजय बच्चन ने बताया कि साप्ताहिक श्रीराम कथा महोत्सव का समापन रविवार को होगा। समापन अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, हवन-पूर्णाहुति, आरती तथा श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। आयोजन समिति ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से समापन समारोह में शामिल होकर धार्मिक अनुष्ठान का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।

