सुरक्षा के भरोसे पर टूटा टकराव, बक्सर में डॉक्टरों का आंदोलन थमा, ओपीडी बहाल, पर चेतावनी बरकरार

बक्सर जिले में बीते दो दिनों से स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है। चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए ठोस आश्वासन के बाद बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार का फैसला स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही सदर अस्पताल समेत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं दोबारा शुरू हो गईं, जिससे हजारों मरीजों ने राहत की सांस ली।

सुरक्षा के भरोसे पर टूटा टकराव, बक्सर में डॉक्टरों का आंदोलन थमा, ओपीडी बहाल, पर चेतावनी बरकरार

-- महिला मरीज की मौत के बाद भड़का था विवाद, एफआईआर और हंगामे से आक्रोशित डॉक्टर, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से बनी सहमति

केटी न्यूज/बक्सर

बक्सर जिले में बीते दो दिनों से स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है। चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए ठोस आश्वासन के बाद बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार का फैसला स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही सदर अस्पताल समेत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं दोबारा शुरू हो गईं, जिससे हजारों मरीजों ने राहत की सांस ली।दरअसल, सदर अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद हालात अचानक बेकाबू हो गए थे। आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।

आरोप है कि इस दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ और एक चिकित्सक के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। इस घटना ने जिलेभर के डॉक्टरों में असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया।घटना के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ की जिला इकाई ने 22 और 23 जनवरी को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया था। निर्णय के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराने की आशंका बढ़ गई थी, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर सदर अस्पताल तक रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।हालात की गंभीरता को देखते हुए पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी और सिविल सर्जन ने पहल करते हुए चिकित्सकों से संवाद किया।

बैठक में डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पताल परिसर में कानून-व्यवस्था, और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने को लेकर ठोस आश्वासन दिया गया। इसी के बाद भासा ने जनहित को प्राथमिकता देते हुए आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया।भासा के जिला सचिव डॉ. संजय कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि संघ ने यह निर्णय मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखकर लिया है, न कि अपनी मांगों से पीछे हटने के कारण। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने जो आश्वासन दिया है, उस पर अमल जरूरी है। यदि भविष्य में अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ हिंसा या दबाव की घटनाएं दोहराई गईं, तो संघ फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।

डॉ. संजय कुमार ने यह भी कहा कि अस्पतालों में इलाज के दौरान तनावपूर्ण स्थिति बनना आम बात है, लेकिन कानून हाथ में लेना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। डॉक्टर मरीजों की जान बचाने के लिए काम करते हैं, ऐसे में उन पर एफआईआर और हमले स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करते हैं।ओपीडी बहाल होने से खासकर ग्रामीण इलाकों के मरीजों को बड़ी राहत मिली है। बहिष्कार की घोषणा के बाद कई मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा था, जहां इलाज महंगा साबित हो रहा था। अब सरकारी अस्पतालों में नियमित सेवाएं शुरू होने से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।

हालांकि, यह संकट पूरी तरह टला है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। डॉक्टरों की चेतावनी साफ है, यदि सुरक्षा व्यवस्था कागजों तक सीमित रही और जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन फिर तेज हो सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अस्पतालों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और डॉक्टरों व मरीजों के बीच भरोसे की खाई को पाटने की है।फिलहाल, बक्सर में टकराव थमा है, इलाज की रफ्तार लौटी है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की परीक्षा अभी बाकी है।