मुआवजे के पेंच में फंसा केसठ प्रखंड कार्यालय भवन निर्माण

प्रखंड मुख्यालय परिसर में प्रस्तावित नए प्रखंड कार्यालय भवन का निर्माण भूमि अधिग्रहण मुआवजे के विवाद में उलझकर रह गया है। करीब एक दशक पहले अधिग्रहित की गई जमीन का उचित मुआवजा अब तक नहीं मिलने से प्रभावित किसानों में भारी नाराजगी है।

मुआवजे के पेंच में फंसा केसठ प्रखंड कार्यालय भवन निर्माण

__ दस वर्ष बाद भी किसानों को नहीं मिला उचित भुगतान, आंदोलन की चेतावनी; प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप

केटी न्यूज/केसठ

प्रखंड मुख्यालय परिसर में प्रस्तावित नए प्रखंड कार्यालय भवन का निर्माण भूमि अधिग्रहण मुआवजे के विवाद में उलझकर रह गया है। करीब एक दशक पहले अधिग्रहित की गई जमीन का उचित मुआवजा अब तक नहीं मिलने से प्रभावित किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के समय प्रशासन ने शीघ्र और न्यायसंगत भुगतान का भरोसा दिलाया था, लेकिन दस वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें उनके अधिकार का पूरा मुआवजा नहीं मिल सका।प्रभावित किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और प्रशासनिक पदाधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रखी, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। लंबे इंतजार के बावजूद मामले का समाधान नहीं होने से किसानों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

उनका आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण उन्हें आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।समाजसेवी सह राजद नेता सुनील कुमार यादव उर्फ पप्पू यादव ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रखंड कार्यालय भवन निर्माण से जुड़ा भूमि मुआवजा मामला वर्षों से लंबित पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। उन्होंने प्रशासन से अविलंब हस्तक्षेप कर लंबित भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की।किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान जिन शर्तों और नियमों के तहत मुआवजा देने की बात कही गई थी, उनका पालन नहीं किया गया। इससे कई परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते मुआवजे का भुगतान कर दिया जाता तो उन्हें वर्षों तक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपील की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। किसानों ने स्पष्ट किया कि अब वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे और अपने अधिकार के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे।इधर, प्रखंड कार्यालय भवन निर्माण और मुआवजे के इस लंबे विवाद को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोग भी प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है। ऐसे में सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह किसानों की वर्षों पुरानी मांग का समाधान कब और कैसे करता है।