संकल्प की साइकिल: 970 किमी की आध्यात्मिक यात्रा पर निकले कुंदन आर्या
आज के दौर में जहां लोग छोटी दूरी तय करने के लिए भी साधनों पर निर्भर हो चुके हैं, वहीं मुजफ्फरपुर के जीरो माइल निवासी कुंदन आर्या अपने मजबूत इरादों के बल पर 970 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा पर निकल पड़े हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि इस पूरे सफर को एक आध्यात्मिक साधना में बदलना है। वे वृंदावन पहुंचकर प्रेमानंद जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं।
__ मुजफ्फरपुर से वृंदावन तक का सफर, हर पैडल के साथ भक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल
केटी न्यूज/डुमरांव
आज के दौर में जहां लोग छोटी दूरी तय करने के लिए भी साधनों पर निर्भर हो चुके हैं, वहीं मुजफ्फरपुर के जीरो माइल निवासी कुंदन आर्या अपने मजबूत इरादों के बल पर 970 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा पर निकल पड़े हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि इस पूरे सफर को एक आध्यात्मिक साधना में बदलना है। वे वृंदावन पहुंचकर प्रेमानंद जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं।इस अनोखी यात्रा के दौरान कुंदन आर्या मंगलवार की सुबह डुमरांव अनुमंडल के नया भोजपुर स्थित सब्जी मंडी पहुंचे। साधारण कपड़े, साइकिल पर सीमित सामान और चेहरे पर दृढ़ संकल्प—उन्हें देखकर हर कोई ठहर गया।

स्थानीय लोगों ने न सिर्फ उनका स्वागत किया, बल्कि उनके इस अद्भुत सफर के पीछे की भावना को भी जानने की कोशिश की।कुंदन बताते हैं कि यह यात्रा उनके लिए किसी रोमांच से ज्यादा एक तपस्या है। वे प्रतिदिन 50 से 60 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं और जहां रात हो जाती है, वहीं विश्राम कर लेते हैं। न कोई तय ठिकाना, न कोई विशेष सुविधा, बस मंजिल तक पहुंचने का जुनून और भीतर की आस्था ही उनका सहारा है।रास्ते में आने वाली चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कभी तेज धूप, तो कभी बदलता मौसम और लंबी दूरी की थकान—लेकिन कुंदन के हौसले इन सब पर भारी पड़ रहे हैं।

उनका कहना है कि हर कठिनाई उन्हें और मजबूत बना रही है। सबसे खास बात यह है कि सफर के दौरान अनजान लोगों से मिल रहा स्नेह और सहयोग उन्हें लगातार आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है।स्थानीय लोगों ने कुंदन के इस जज्बे की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। कई लोगों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणा बताया, जो यह सिखाता है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी रास्ता मुश्किल नहीं होता।कुंदन आर्या की यह साइकिल यात्रा सिर्फ एक दूरी तय करने की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और आस्था की एक जीवंत मिसाल बनती जा रही है—एक ऐसा सफर, जो मंजिल से ज्यादा रास्ते में खुद को खोजने की प्रेरणा देता है।

