मजदूर पिता की बेटी ने रचा इतिहास, बीपीएससी में सफलता के साथ बनी स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर
कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत इरादों के दम पर चौसा प्रखंड के बनारपुर गांव की बेटी सुंदरी कुमारी ने सफलता की नई कहानी लिखी है। 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा में सुंदरी ने 150वीं रैंक हासिल कर स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर पद के लिए चयनित होकर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

__ 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग परीक्षा में 150वीं रैंक हासिल कर सुंदरी कुमारी ने बढ़ाया चौसा का मान, बिना कोचिंग घर पर रहकर की थी तैयारी
केटी न्यूज/चौसा
कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत इरादों के दम पर चौसा प्रखंड के बनारपुर गांव की बेटी सुंदरी कुमारी ने सफलता की नई कहानी लिखी है। 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा में सुंदरी ने 150वीं रैंक हासिल कर स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर पद के लिए चयनित होकर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।साधारण परिवार से आने वाली सुंदरी की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच यह मुकाम हासिल किया। उनके पिता अनिल राम मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक परेशानियों के बावजूद सुंदरी ने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया और बिना किसी कोचिंग संस्थान के सहारे घर पर रहकर तैयारी जारी रखी।

सुंदरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के उच्च विद्यालय से पूरी की, जबकि महर्षि विश्वामित्र कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही उनके मन में अधिकारी बनने का सपना था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की। पहली बार बीपीएससी की मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिल सकी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।कम आय और सीमित साधनों के बावजूद सुंदरी ने दोबारा पूरी तैयारी के साथ परीक्षा दी। प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी उन्होंने घर पर रहकर की, जबकि मुख्य परीक्षा के लिए पटना जाकर मेहनत की। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने शानदार सफलता हासिल कर ली।

अपनी सफलता पर सुंदरी ने कहा कि लगन और मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। अगर मन में विश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो कठिन से कठिन मंजिल भी हासिल की जा सकती है।सुंदरी की उपलब्धि की खबर मिलते ही बनारपुर गांव में खुशी का माहौल है। परिजनों, ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। ग्रामीणों का कहना है कि सुंदरी ने साबित कर दिया है कि गांव की बेटियां भी मेहनत और हौसले के दम पर बड़े पदों तक पहुंच सकती हैं।सुंदरी कुमारी की सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सीमित संसाधनों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

