भू-अर्जन मुआवजा को लेकर रैयतों और प्रशासन के बीच बनी असहमति
प्रखंड क्षेत्र में अंचल निर्माण एवं विकास कार्य के लिए अधिग्रहित की जा रही भूमि के मुआवजा भुगतान को लेकर रैयतों और प्रशासन के बीच असहमति बनी हुई है। प्रभावित भू-स्वामियों ने भूमि का मूल्य वर्तमान बाजार दर के अनुसार तय करने की मांग करते हुए अंचल पदाधिकारी केसठ को आवेदन सौंपा है।
केटी न्यूज/केसठ।
प्रखंड क्षेत्र में अंचल निर्माण एवं विकास कार्य के लिए अधिग्रहित की जा रही भूमि के मुआवजा भुगतान को लेकर रैयतों और प्रशासन के बीच असहमति बनी हुई है। प्रभावित भू-स्वामियों ने भूमि का मूल्य वर्तमान बाजार दर के अनुसार तय करने की मांग करते हुए अंचल पदाधिकारी केसठ को आवेदन सौंपा है।रैयतों का कहना है कि अधिग्रहण के समय उन्हें यह बताया गया था कि भूमि का भुगतान वर्तमान सरकारी दर पर डिसमिल के अनुसार किया जाएगा, जिसके आधार पर उन्होंने स्वीकृति रजिस्टर पर हस्ताक्षर किया।

रैयतों के अनुसार अधिग्रहित भूमि गांव के बीचों-बीच स्थित है तथा अंचल मुख्यालय से सटी होने के कारण इसकी प्रकृति आवासीय है। रैयतों ने आरोप लगाया कि अब उन्हें वर्ष 2013-14 के सरकारी एलआर रेट के आधार पर कृषि भूमि मानते हुए चार गुना मुआवजा देने की बात कही जा रही है, जो वर्तमान दर की तुलना में काफी कम है। इतना कम भुगतान मिलने पर वे वैकल्पिक भूमि खरीदकर आवास निर्माण करने में असमर्थ होंगे।

मामले को लेकर सोमवार को मनरेगा भवन के सभागार में बीडीओ विजय कुमार सौरभ की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई, जिसमें केसठ पंचायत के मुखिया अरविंद कुमार यादव उर्फ गामा पहलवान तथा प्रभावित रैयत शामिल हुए। बैठक के दौरान बीडीओ ने स्पष्ट किया कि जिस दर पर भूमि का भुगतान स्वीकृत किया गया है, उसी दर से ग्रामीण विकास विभाग द्वारा राशि का आवंटन हो चुका है, ऐसे में अब मुआवजा दर में बदलाव संभव नहीं है।

इस पर रैयतों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उस समय और वर्तमान में काफी अंतर आ चुका है। उन्होंने मांग की कि मुआवजा राशि शुद्ध और एकमुश्त भुगतान के रूप में दी जाए, न कि किस्तों में। बीडीओ ने आश्वासन दिया कि इस संबंध में जिला के वरीय पदाधिकारियों से वार्ता की जाएगी। हालांकि बैठक के बाद भी कुछ रैयतों का विरोध जारी रहा।
