सरकारी जमीन से लेकर कॉलेज तक पर डीएम का अल्टीमेटम
जिले में सरकारी योजनाओं की सुस्त रफ्तार और अफसरों की ढिलाई पर जिलाधिकारी साहिला ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया। समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित जिला समन्वय समिति की बैठक में डीएम ने एक-एक विभाग की समीक्षा करते हुए साफ कर दिया कि अब बहानेबाजी नहीं चलेगी।


--समन्वय समिति की बैठक में अफसरों की क्लास, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
केटी न्यूज/बक्सर
जिले में सरकारी योजनाओं की सुस्त रफ्तार और अफसरों की ढिलाई पर जिलाधिकारी साहिला ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया। समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित जिला समन्वय समिति की बैठक में डीएम ने एक-एक विभाग की समीक्षा करते हुए साफ कर दिया कि अब बहानेबाजी नहीं चलेगी। सरकारी भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने से लेकर सहयोग शिविर की व्यवस्था, वृक्षारोपण अभियान और डिग्री कॉलेज निर्माण तक सभी मामलों में अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया गया।बैठक में सबसे ज्यादा जोर सरकारी भवनों के लिए भूमि उपलब्ध कराने पर रहा। डीएम ने सभी अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया कि विभिन्न विभागों के भवन निर्माण हेतु आवश्यक जमीन का प्रस्ताव जल्द से जल्द अनुमंडल पदाधिकारी के माध्यम से भेजें।

उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित रकबा के अनुसार सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं है तो इच्छुक रैयतों से लीज पर जमीन लेने का प्रस्ताव भी तैयार किया जाए। इस मामले में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।आगामी 2 जून को आयोजित होने वाले सहयोग शिविर को लेकर भी जिलाधिकारी ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को शिविर स्थल पर पेयजल, शौचालय, धूप से बचाव के लिए शेड और बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। डीएम ने दो टूक कहा कि यदि शिविर में मूलभूत सुविधाओं की कमी मिली तो संबंधित बीडीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यह संकेत साफ दिखा कि प्रशासन अब जनता से जुड़े कार्यक्रमों में किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं चाहता।

मनरेगा के तहत वृक्षारोपण अभियान की समीक्षा के दौरान भी जिलाधिकारी ने नाराजगी जाहिर की। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, मनरेगा को निर्देश दिया गया कि लक्ष्य के अनुरूप कार्य सुनिश्चित करें। लाभुकों के खेत, सिंचाई की उपलब्धता और जमीन की स्थिति का सत्यापन कर पात्र लोगों को चयनित किया जाए। साथ ही वृक्षारोपण से जुड़े सभी जरूरी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया ताकि योजना सिर्फ कागजों तक सीमित न रह जाए।शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी बैठक में अहम चर्चा हुई। जिन प्रखंडों में अब तक डिग्री कॉलेज नहीं है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कॉलेज निर्माण की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया। जिला शिक्षा पदाधिकारी को संबंधित प्रखंडों के वरीय अधिकारियों से निरीक्षण कराकर निर्धारित प्रपत्र में जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया।

माना जा रहा है कि इससे ग्रामीण इलाकों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।बैठक के दौरान लंबित न्यायिक मामलों पर भी डीएम ने सख्त रुख अपनाया। सीडब्ल्यूजेसी और एमजेसी मामलों की समीक्षा करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि तथ्य विवरणी समय पर तैयार कर एक सप्ताह के भीतर मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करें। डीएम ने स्पष्ट कहा कि कोर्ट से जुड़े मामलों में देरी प्रशासन की छवि खराब करती है और इसमें किसी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।

