डुमरांव की रफ्तार पर भारी पड़े बालू के ट्रेलर, बाईपास की फाइलों में अटका शहर का भविष्य

डुमरांव शहर की सड़कों पर अब सफर करना लोगों के लिए रोज की चुनौती बन गया है। भारी वाहनों की बढ़ती संख्या और वर्षों से लंबित बाईपास योजना ने शहर की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। बुधवार को नया थाना से महज 100 मीटर की दूरी पर बालू लदे एक ट्रेलर का गुल्ला टूटने के बाद डुमरांव-बिक्रमगंज मुख्य मार्ग पर ऐसा जाम लगा कि घंटों तक यातायात व्यवस्था ठप रही।

डुमरांव की रफ्तार पर भारी पड़े बालू के ट्रेलर, बाईपास की फाइलों में अटका शहर का भविष्य

__ छह साल बाद भी नहीं मिली जाम से मुक्ति, भारी वाहनों के दबाव में दम तोड़ रही यातायात व्यवस्था, मुआवजे के विवाद ने रोकी बाईपास की राह

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव शहर की सड़कों पर अब सफर करना लोगों के लिए रोज की चुनौती बन गया है। भारी वाहनों की बढ़ती संख्या और वर्षों से लंबित बाईपास योजना ने शहर की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। बुधवार को नया थाना से महज 100 मीटर की दूरी पर बालू लदे एक ट्रेलर का गुल्ला टूटने के बाद डुमरांव-बिक्रमगंज मुख्य मार्ग पर ऐसा जाम लगा कि घंटों तक यातायात व्यवस्था ठप रही। लंगटू महादेव मंदिर से लेकर नया थाना तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। राहगीर, स्कूली बच्चे, दुकानदार और मरीज तक परेशान होते रहे।पुलिस प्रशासन ने जाम हटाने की कोशिश की, लेकिन भारी वाहनों के दबाव के आगे व्यवस्था भी बेबस नजर आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि डुमरांव में बालू लदे ट्रेलर और ट्रकों का परिचालन अब शहर के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। आए दिन खराब वाहन, दुर्घटना और जाम की स्थिति आम हो गई है।

__ नो-एंट्री खुलते ही शहर बन जाता है ट्रकों का अड्डा

शहर में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश की अनुमति मिलते ही सड़कों पर ट्रकों और ट्रेलरों का दबाव अचानक बढ़ जाता है। संकरी सड़कें और बेतहाशा बढ़े भारी वाहनों की संख्या के कारण कई बार पूरी रात शहर जाम से जूझता रहता है। धूल, शोर और प्रदूषण ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि डुमरांव की सड़कें वर्तमान में जितना भार झेल रही हैं, उसके लिए बनी ही नहीं थीं। शहर के मुख्य बाजारों में भी जाम का असर साफ दिख रहा है। कई लोग जाम की परेशानी से बचने के लिए बाजार आने से कतराने लगे हैं। 

 __ दुकानदारों के कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।

छह साल से अधूरी बाईपास योजना बनी उम्मीद और सवाल शहर को भारी वाहनों के दबाव से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित डुमरांव बाईपास योजना पिछले छह वर्षों से अधर में लटकी है। करीब साढ़े पांच किलोमीटर लंबे इस बाईपास के लिए भोजपुर कदीम, भोजपुर जदीद, बनकट और पुरैनी मौजा में जमीन अधिग्रहण की योजना बनाई गई थी। प्रशासन की ओर से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई देती है।कई किसान अब भी मुआवजे को लेकर नाराज हैं। उनका कहना है कि उन्हें मौजूदा बाजार मूल्य के अनुसार नहीं बल्कि पुराने सर्किल रेट के आधार पर भुगतान किया जा रहा है। इसी विवाद के कारण बाईपास निर्माण की रफ्तार थमी हुई है।

__ जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज, लेकिन समाधान का इंतजार

बाईपास निर्माण में देरी का मुद्दा कई बार राजनीतिक मंचों पर भी उठ चुका है। पूर्व विधायक डॉ. अजित कुमार सिंह ने इसे विधानसभा में प्रमुखता से रखा था। वहीं वर्तमान विधायक राहुल कुमार सिंह ने भी दिशा की बैठक में इस समस्या को उठाते हुए जल्द समाधान की मांग की है। बावजूद इसके शहरवासियों को अभी भी राहत का इंतजार है।

__ ट्रक चालकों की भी अपनी मजबूरी

भारी वाहनों के कारण परेशान शहरवासियों के साथ ट्रक चालक भी व्यवस्था से परेशान हैं। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर निवासी चालक मो. इम्तियाज, मनु यादव और कमलेश यादव बताते हैं कि नो-एंट्री के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। सुबह से खड़े रहने के बाद रात में शहर में प्रवेश मिलता है और डुमरांव पार करने में ही कई घंटे लग जाते हैं।चालकों का कहना है कि जाम और प्रतिबंधों के कारण ट्रिप कम हो गई हैं, जिससे कमाई प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि वे भी इस समस्या को समझते हैं, लेकिन वैकल्पिक रास्ता नहीं होने के कारण मजबूर हैं।पिछले कुछ वर्षों में बालू ढोने वाले ट्रेलरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में जब तक बाईपास योजना जमीन पर नहीं उतरती, तब तक डुमरांव को जाम, धूल और भारी वाहनों के दबाव से राहत मिलना मुश्किल दिखाई दे रहा है।