41 वर्षों की शैक्षणिक सेवा के बाद डॉ महेंद्र प्रताप सिंह सेवानिवृत्त
महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ महेंद्र प्रताप सिंह के सेवानिवृत्त होने पर शुक्रवार को महाविद्यालय परिसर में सम्मान समारोह का आयोजन गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कृष्णा कान्त सिंह ने की। समारोह में शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की बड़ी संख्या मौजूद रही।


--महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में सम्मान समारोह आयोजित, शिक्षकों व विद्यार्थियों ने दी भावभीनी विदाई
केटी न्यूज/बक्सर
महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ महेंद्र प्रताप सिंह के सेवानिवृत्त होने पर शुक्रवार को महाविद्यालय परिसर में सम्मान समारोह का आयोजन गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कृष्णा कान्त सिंह ने की। समारोह में शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की बड़ी संख्या मौजूद रही।प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कृष्णा कान्त सिंह ने कहा कि डॉ महेंद्र प्रताप Singh ने अपने 41 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा में शिक्षा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।


उन्होंने महाविद्यालय में 17 वर्षों तक सेवा देते हुए इतिहास विभाग को नई पहचान दिलाने का कार्य किया।उन्होंने कहा कि डॉ सिंह का व्यक्तित्व, कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।समारोह की विशेषता यह रही कि महाविद्यालय के कई सेवानिवृत्त शिक्षक भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य प्रो. सुभाष चन्द्र पाठक, प्रो. श्याम जी मिश्रा, प्रो. टी.एन. पांडेय, प्रो. सुरेन्द्र सिंह, प्रो. मोहनलाल श्रीवास्तव तथा डॉ. परमात्मा पाठक ने डॉ सिंह के शैक्षणिक योगदान और सौम्य व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


इस अवसर पर शिक्षकों और कर्मचारियों ने डॉ महेंद्र प्रताप सिंह को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान विद्यार्थियों के बीच अनुशासन, अध्ययनशीलता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।अपने संबोधन में डॉ महेंद्र प्रताप सिंह ने महाविद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां बिताए गए 17 वर्षों की स्मृतियां सदैव उनके हृदय में जीवंत रहेंगी।कार्यक्रम का संचालन स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नवीन शंकर पाठक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. छाया चौबे ने प्रस्तुत किया। अंत में भावुक माहौल के बीच समारोह संपन्न हुआ।

