सम्राट चौधरी के आगमन से जागीं उम्मीदें, मगर डुमरांव का शहीद पार्क अब भी ताले में कैद
शहर के बीचोंबीच स्थित शहीद पार्क कभी डुमरांववासियों के लिए सुकून और गर्व का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज यह प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाल व्यवस्था की कहानी बयां कर रहा है। सन् 1942 के अमर शहीदों की स्मृति में बुडको द्वारा निर्मित इस पार्क का उद्घाटन 12 जनवरी 2018 को बड़े उत्साह के साथ किया गया था।


--अमर शहीदों की स्मृति पर बदहाली की परत, बंद पार्क और गंदगी से शहरवासियों में बढ़ रहा आक्रोश
केटी न्यूज/डुमरांव
शहर के बीचोंबीच स्थित शहीद पार्क कभी डुमरांववासियों के लिए सुकून और गर्व का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज यह प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाल व्यवस्था की कहानी बयां कर रहा है। सन् 1942 के अमर शहीदों की स्मृति में बुडको द्वारा निर्मित इस पार्क का उद्घाटन 12 जनवरी 2018 को बड़े उत्साह के साथ किया गया था। उस समय लोगों को उम्मीद थी कि यह स्थान शहर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ नागरिकों को खुला और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराएगा। लेकिन वर्षों बाद भी हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण पार्क ताले में कैद होकर रह गया है।शनिवार को सूबे के मुखिया सम्राट चौधरी के बक्सर आगमन को लेकर जिले में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

वहीं डुमरांववासियों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि अमर शहीदों की याद में बना पार्क अब तक बंद पड़ा है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि यदि मुख्यमंत्री के आगमन से शहीद पार्क भी ताले की जकड़ से बाहर निकल जाए तो यह डुमरांव के लिए सबसे बड़ी सौगात होगी।भीषण गर्मी के बावजूद पार्क के मुख्य गेट पर हर समय ताला लटका रहता है। छांव और खुले वातावरण की तलाश में आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे निराश होकर लौट जाते हैं। अंदर चारों ओर झाड़ियां, घास-फूस और गंदगी फैली हुई है। बच्चों के झूले और ओपन जिम जर्जर हो चुके हैं। नियमित देखरेख नहीं होने से करोड़ों की लागत से बना यह पार्क अपनी पहचान खोता जा रहा है।स्थानीय निवासी मोहन गुप्ता, शमीम मंसूरी, पवन श्रीवास्तव और राजकुमार प्रसाद का कहना है कि पार्क को व्यवस्थित करने के लिए किसी बड़े बजट की आवश्यकता नहीं है।

नियमित सफाई, घास कटाई और समय पर खोलने-बंद करने की व्यवस्था से इसकी पुरानी रौनक लौट सकती है।पार्क के दक्षिणी हिस्से में सार्वजनिक यूरिनल नहीं होने से लोग खुले में मूत्रत्याग करते हैं, जिससे बदबू और गंदगी फैल रही है। इसका असर चाहरदीवारी पर भी दिखने लगा है। वहीं पूरब और दक्षिण दिशा में अवैध पार्किंग तथा अतिक्रमण से सड़क संकरी हो गई है। ठेला चालकों और कूड़ा जमा होने से राहगीरों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।शहरवासियों का कहना है कि शहीदों की स्मृति से जुड़े इस स्थल की अनदेखी केवल एक पार्क की उपेक्षा नहीं, बल्कि अमर बलिदानियों के सम्मान के साथ भी अन्याय है।

