एमवी कॉलेज में पहली बार अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, बक्सर बनेगा वैश्विक बौद्धिक विमर्श का केंद्र

महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय (एमवी कॉलेज) में 12 एवं 13 मई को पहली बार दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन होने जा रहा है। “भारतीय ज्ञान परंपरा में मानवता : एक अनंत यात्रा” विषय पर आधारित इस आयोजन को लेकर महाविद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल है। देश-विदेश के विद्वानों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों की सहभागिता से बक्सर का यह शैक्षणिक संस्थान वैश्विक बौद्धिक विमर्श का केंद्र बनने जा रहा है।

एमवी कॉलेज में पहली बार अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, बक्सर बनेगा वैश्विक बौद्धिक विमर्श का केंद्र

केटी न्यूज/बक्सर

महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय (एमवी कॉलेज) में 12 एवं 13 मई को पहली बार दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन होने जा रहा है। “भारतीय ज्ञान परंपरा में मानवता : एक अनंत यात्रा” विषय पर आधारित इस आयोजन को लेकर महाविद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल है। देश-विदेश के विद्वानों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों की सहभागिता से बक्सर का यह शैक्षणिक संस्थान वैश्विक बौद्धिक विमर्श का केंद्र बनने जा रहा है।सेमिनार का आयोजन महाविद्यालय के अंग्रेजी एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम की तैयारी अंतिम चरण में है।

महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. कृष्णकांत सिंह के नेतृत्व में आयोजन को सफल बनाने के लिए शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।आयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा, मानवता, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर गहन चर्चा होगी। सेमिनार में शोध पत्र प्रस्तुतिकरण के साथ पोस्टर प्रेजेंटेशन की भी व्यवस्था की गई है, जिससे युवा शोधार्थियों और विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। छात्र-छात्राओं के लिए पंजीकरण शुल्क 300 रुपये तथा शिक्षकों के लिए सहभागिता शुल्क 1000 रुपये निर्धारित किया गया है।

महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजन से न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद के मानकों के अनुरूप संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।कॉलेज परिवार ने छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, मीडिया कर्मियों और शिक्षाविदों से अधिकाधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है। बक्सर में पहली बार आयोजित हो रहा यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।