डुमरांव में परिवार नियोजन अभियान को मिली नई रफ्तार, डॉ प्रेमा कुमारी को मिला सम्मान

डुमरांव अनुमंडल अस्पताल में परिवार नियोजन कार्यक्रम को गति देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को अब सरकारी स्तर पर भी सराहना मिल रही है। इसी कड़ी में अनुमंडल अस्पताल की प्रभारी उपाधीक्षक डॉ प्रेमा कुमारी को परिवार नियोजन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।

डुमरांव में परिवार नियोजन अभियान को मिली नई रफ्तार, डॉ प्रेमा कुमारी को मिला सम्मान

__ अनुमंडल अस्पताल की प्रभारी उपाधीक्षक ने तीन माह में लगाए 224 आईयूसीडी, स्वास्थ्य विभाग ने प्रशस्ति पत्र देकर सराहा योगदान

केटी न्यूज/डुमरांव:

डुमरांव अनुमंडल अस्पताल में परिवार नियोजन कार्यक्रम को गति देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को अब सरकारी स्तर पर भी सराहना मिल रही है। इसी कड़ी में अनुमंडल अस्पताल की प्रभारी उपाधीक्षक डॉ प्रेमा कुमारी को परिवार नियोजन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में उन चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने परिवार नियोजन कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

इसी क्रम में डॉ प्रेमा कुमारी को जनवरी 2025 से मार्च 2025 के बीच किए गए बेहतर कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस अवधि के दौरान डॉ प्रेमा कुमारी ने कुल 224 महिलाओं को आईयूसीडी (इंट्रा यूट्राइन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस) की सुविधा उपलब्ध कराई। उनके इस प्रयास से न केवल परिवार नियोजन कार्यक्रम को मजबूती मिली, बल्कि क्षेत्र की महिलाओं में सुरक्षित गर्भनिरोधक उपायों के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आईयूसीडी परिवार नियोजन का एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है, जिसे महिलाओं के गर्भाशय में लगाया जाता है।

यह गर्भनिरोधक विधि लंबे समय तक असरदार रहती है और सामान्य तौर पर तीन से दस वर्षों तक गर्भधारण को रोकने में सक्षम होती है। इसकी खासियत यह भी है कि यह पूरी तरह प्रतिवर्ती विधि है। यानी महिला जब चाहे इसे निकलवाकर फिर से गर्भधारण कर सकती है।अधिकारियों ने कहा कि परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका बेहद अहम होती है। लोगों को सही जानकारी देना, उन्हें सुरक्षित विकल्पों के बारे में जागरूक करना और भरोसा दिलाना इस अभियान की सफलता की कुंजी है।

डॉ प्रेमा कुमारी के इस कार्य को स्वास्थ्य विभाग ने अन्य चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी प्रेरणादायी बताया। विभाग का मानना है कि ऐसे प्रयासों से न केवल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि जनसंख्या नियंत्रण और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा।