बक्सर में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान का आगाज़, डीएम ने बच्चों को दवा खिलाकर किया शुभारंभ
फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में बक्सर जिला प्रशासन ने व्यापक अभियान की शुरुआत कर दी है। जिलाधिकारी साहिला ने बुधवार को इटाढ़ी प्रखंड के अतरौना पंचायत के सिकटौना गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 17 पर बच्चों को स्वयं फाइलेरिया रोधी दवा खिलाकर सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, आंगनबाड़ी सेविका और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
-- 10 से 24 फरवरी तक चलेगा एमडीए कार्यक्रम, दो वर्ष से कम आयु के बच्चों व गर्भवती महिलाओं को छोड़ सभी को दवा सेवन की अपील
केटी न्यूज/बक्सर
फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में बक्सर जिला प्रशासन ने व्यापक अभियान की शुरुआत कर दी है। जिलाधिकारी साहिला ने बुधवार को इटाढ़ी प्रखंड के अतरौना पंचायत के सिकटौना गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 17 पर बच्चों को स्वयं फाइलेरिया रोधी दवा खिलाकर सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, आंगनबाड़ी सेविका और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।शुभारंभ के मौके पर जिलाधिकारी ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से रोके जाने योग्य बीमारी है। इसे आम बोलचाल में ‘हाथीपांव’ के नाम से जाना जाता है, जो मच्छर के काटने से फैलती है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी विश्व की दूसरी सबसे बड़ी दिव्यांगता उत्पन्न करने वाली बीमारी मानी जाती है।

इसकी भयावहता इस बात से समझी जा सकती है कि कई मामलों में इसके लक्षण 5 से 15 वर्षों बाद सामने आते हैं, जिससे रोगी को लंबे समय तक बिना जानकारी के संक्रमण झेलना पड़ता है।जिलाधिकारी ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी जा रही दवाओं का सेवन अवश्य करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल में केवल एक बार निर्धारित फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करने से इस बीमारी से प्रभावी बचाव संभव है। सामूहिक प्रयास और जागरूकता से ही जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है।स्वास्थ्य विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि बक्सर जिले के सभी प्रखंडों में 10 फरवरी से 24 फरवरी तक एमडीए कार्यक्रम चलाया जाएगा।

इस दौरान आशा कार्यकर्ता और एएनएम घर-घर जाकर पात्र व्यक्तियों को दवा खिलाएंगी। प्रशासन ने विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि कोई भी पात्र व्यक्ति दवा सेवन से वंचित न रह जाए।अधिकारियों ने बताया कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा अत्यधिक गंभीर बीमारी से ग्रसित वयस्कों को छोड़कर सभी लोगों को यह दवा दी जाएगी। दवा का सेवन भरपेट नाश्ता या भोजन करने के बाद ही करना है, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस संबंध में स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।जिलाधिकारी ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी का अभियान है।

जब तक समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी नहीं होगी, तब तक इस बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और स्वयंसेवी संगठनों से भी जागरूकता फैलाने में सहयोग करने की अपील की।कार्यक्रम के दौरान बच्चों और अभिभावकों को दवा सेवन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई तथा किसी भी प्रकार की शंका होने पर तत्काल स्वास्थ्य कर्मियों से संपर्क करने की सलाह दी गई। प्रशासन का लक्ष्य है कि निर्धारित अवधि में अधिकतम कवरेज सुनिश्चित कर जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाए।

