स्वच्छता के प्रतीक पर गंदगी का कब्जा, 'वी लव चकाचक डुमरांव' बोर्ड बना व्यवस्था पर सवाल
शहर को स्वच्छता का संदेश देने के लिए स्थापित किया गया 'वी लव चकाचक डुमरांव' बोर्ड आज खुद बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है। पुराना भोजपुर चौक स्थित यह प्रतीकात्मक स्थल, जो कभी शहर की पहचान और आकर्षण का केंद्र था, अब गंदगी, अवैध अतिक्रमण और खुले में मांस की कटाई के कारण अपनी गरिमा खो चुका है।

__ पुराना भोजपुर चौक पर खुले में मांस की कटाई, अतिक्रमण और दुर्गंध से लोग परेशान; रखरखाव के अभाव में छह माह से बंद पड़ी हैं बोर्ड की लाइटें
केटी न्यूज/डुमरांव
शहर को स्वच्छता का संदेश देने के लिए स्थापित किया गया 'वी लव चकाचक डुमरांव' बोर्ड आज खुद बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है। पुराना भोजपुर चौक स्थित यह प्रतीकात्मक स्थल, जो कभी शहर की पहचान और आकर्षण का केंद्र था, अब गंदगी, अवैध अतिक्रमण और खुले में मांस की कटाई के कारण अपनी गरिमा खो चुका है। स्वच्छता अभियान का चेहरा माना जाने वाला यह स्थान अब नगर परिषद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।बोर्ड के ठीक नीचे और आसपास करीब आधा दर्जन मांस की दुकानें अतिक्रमण कर संचालित की जा रही हैं। यहां प्रतिदिन खुलेआम मुर्गों और बकरों की कटाई होती है। कटाई के बाद मांस के अवशेष और अन्य अपशिष्ट सड़क किनारे ही फेंक दिए जाते हैं, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है। इस वजह से स्थानीय लोगों, दुकानदारों और राहगीरों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खुले में मांस की बिक्री और पशु कटाई पर स्पष्ट प्रतिबंध होने के बावजूद संबंधित विभाग कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है। लोगों का सवाल है कि शहर के अन्य हिस्सों में छोटे-छोटे उल्लंघनों पर चालान और जुर्माने की कार्रवाई करने वाली नगर परिषद इस गंभीर मामले में आखिर क्यों मौन बनी हुई है। इससे कार्रवाई की निष्पक्षता और प्रशासन की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठ रहे हैं।नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद स्वच्छता अभियान का प्रचार-प्रसार तो बड़े स्तर पर करती है, लेकिन जहां वास्तव में व्यवस्था सुधारने की जरूरत है, वहां उदासीनता दिखाई देती है। परिणामस्वरूप स्वच्छता का संदेश देने वाला यह प्रतीकात्मक स्थल ही अव्यवस्था का केंद्र बन गया है। लोगों का कहना है कि केवल बोर्ड, स्लोगन और प्रचार से शहर स्वच्छ नहीं बन सकता।

इसके लिए जमीन पर नियमित सफाई, अतिक्रमण हटाने और नियमों का समान रूप से पालन कराना जरूरी है।गौरतलब है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले तत्कालीन नगर परिषद सभापति सुनीता गुप्ता की अनुशंसा पर पुराना भोजपुर चौक पर 'वी लव चकाचक डुमरांव' बोर्ड स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य शहरवासियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और चौक की सुंदरता बढ़ाना था। शुरुआती दिनों में यह स्थल सेल्फी प्वाइंट के रूप में भी काफी लोकप्रिय रहा, लेकिन समय के साथ इसका रखरखाव लगभग बंद हो गया।स्थिति यह है कि पिछले लगभग छह महीनों से बोर्ड की लाइटें भी बंद पड़ी हैं। रखरखाव के अभाव में इसकी आकर्षक पहचान धूमिल हो चुकी है। चारों ओर फैली गंदगी, कूड़े का अंबार और अवैध अतिक्रमण ने इस स्थल की उपयोगिता और सुंदरता दोनों को प्रभावित किया है।

पूर्व सरपंच प्रतिनिधि भरत चौधरी समेत कई स्थानीय लोगों ने नगर परिषद से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वास्तव में 'चकाचक डुमरांव' का सपना साकार करना है तो सबसे पहले स्वच्छता के प्रतीक स्थलों की गरिमा बहाल करनी होगी। इसके लिए अवैध अतिक्रमण हटाना, खुले में मांस की बिक्री और पशु कटाई पर प्रभावी रोक लगाना, नियमित सफाई सुनिश्चित करना तथा बंद पड़ी लाइटों को तत्काल चालू कराना आवश्यक है।स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि स्वच्छता के प्रतीक स्थल की यह स्थिति बनी रही तो नगर परिषद के अभियान केवल कागजों और नारों तक ही सीमित रह जाएंगे। फिलहाल पुराना भोजपुर चौक का दृश्य यही सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या स्वच्छता अभियान केवल प्रचार का माध्यम बनकर रह गया है, या फिर इसे धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी भी प्रशासन निभाएगा।

