बक्सर में महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस: वन स्टॉप सेंटर को और प्रभावी बनाने के निर्देश

महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बक्सर स्थित वन स्टॉप सेंटर के कार्यों की गहन समीक्षा की गई। शनिवार को जिलाधिकारी साहिला एवं पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने संयुक्त रूप से वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया और इसकी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

बक्सर में महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस: वन स्टॉप सेंटर को और प्रभावी बनाने के निर्देश

__ डीएम साहिला और एसपी शुभम आर्य ने किया संयुक्त निरीक्षण, स्किल मैपिंग व जागरूकता अभियान तेज करने पर जोर

केटी न्यूज/बक्सर:

महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बक्सर स्थित वन स्टॉप सेंटर के कार्यों की गहन समीक्षा की गई। शनिवार को जिलाधिकारी साहिला एवं पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने संयुक्त रूप से वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया और इसकी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।वर्तमान में यह केंद्र बक्सर सदर प्रखंड परिसर में अपने भवन से संचालित हो रहा है, जहां हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली तथा संधारित पंजियों की जांच कर मामलों के निष्पादन की स्थिति का आकलन किया।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि केंद्र पर आने वाली पीड़ित महिलाओं की स्किल मैपिंग कर उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ना सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। साथ ही, हिंसा से प्रभावित महिलाओं के मामलों का नियमित फॉलोअप करने पर भी विशेष जोर दिया गया।केंद्र प्रशासक को निर्देशित किया गया कि सभी मामलों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए तथा पीड़ित महिलाओं को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके अतिरिक्त, जिले के प्रमुख चौक-चौराहों और ग्रामीण क्षेत्रों में वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी बल दिया गया, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाएं इसका लाभ उठा सकें।

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रचार-प्रसार के प्रयासों से लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी क्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर पीड़ित महिलाओं तक पहुंचने, उनका काउंसलिंग करने और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।पुलिस अधीक्षक ने भी इस दौरान अहम निर्देश देते हुए कहा कि थानाध्यक्षों के साथ होने वाली बैठकों में वन स्टॉप सेंटर के प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा से संबंधित सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया।

--मामलों की स्थिति पर एक नजर:

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान वन स्टॉप सेंटर में कुल 145 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें घरेलू हिंसा के 97, दहेज प्रताड़ना के 7, बाल विवाह के 7, यौन शोषण के 2, साइबर क्राइम का 1, द्वितीय विवाह के 21 तथा अन्य 10 मामले शामिल हैं।इनमें से अब तक 83 घरेलू हिंसा, 7 दहेज प्रताड़ना, 1 यौन शोषण, 20 साइबर क्राइम, 2 बाल विवाह, 2 द्वितीय विवाह और 12 अन्य मामलों का सफल निष्पादन किया जा चुका है।

--क्या है वन स्टॉप सेंटर:

वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए एक समेकित सहायता केंद्र है, जहां किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाओं को चिकित्सकीय सहायता, कानूनी परामर्श, मनोसामाजिक काउंसलिंग और अधिकतम पांच दिनों तक अस्थायी आश्रय की सुविधा दी जाती है। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जाता है।निरीक्षण के दौरान जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस), जिला मिशन समन्वयक, केंद्र प्रशासक एवं अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।