डुमरांव के पूर्व विधायक ने मांगी ईवीएम-वीवीपैट से जुड़ी अहम जानकारियां
डुमरांव विधानसभा क्षेत्र में चुनावी पारदर्शिता को लेकर शुक्रवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माले) लिबरेशन के महागठबंधन समर्थित प्रत्याशी तथा डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने जिला पदाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी को विस्तृत आवेदन सौंपा। दोपहर एक बजे दिए गए इस आवेदन में उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए छह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।
-- छह बिंदुओं वाले आवेदन से प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ी, विपक्ष ने कहा, लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखना आवश्यक
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव विधानसभा क्षेत्र में चुनावी पारदर्शिता को लेकर शुक्रवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माले) लिबरेशन के महागठबंधन समर्थित प्रत्याशी तथा डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने जिला पदाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी को विस्तृत आवेदन सौंपा। दोपहर एक बजे दिए गए इस आवेदन में उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए छह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।

चुनाव नतीजों के बाद विभिन्न क्षेत्रों में उठ रहे सवालों और तकनीकी पारदर्शिता की मांग के बीच पूर्व विधायक का यह कदम प्रशासनिक सतर्कता को एक नया आयाम देता है। उनका कहना है कि निर्वाचन नियमावली 1961, ईसीआई की रिटर्निंग ऑफिसर्स पुस्तिका (2022), वेबकास्टिंग, सीसीटीवी दिशा-निर्देश और नियम 93, 94 एवं 95 के तहत हर प्रत्याशी को कुछ संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं, जिनका पालन चुनावी शुचिता के लिए अनिवार्य है।
सबसे पहले उन्होंने 6 नवंबर 2025 को हुए मतदान के दौरान सभी मतदान केंद्रों की सीसीटीवी और वेबकास्टिंग फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की है। उनके अनुसार आयोग के निर्देशों के मुताबिक यह फुटेज चुनावी गतिविधियों की विश्वसनीयता का मूल दस्तावेज होता है, जिसे सार्वजनिक और जांच-योग्य रखना आवश्यक है।दूसरे बिंदु में पूर्व विधायक ने बूथ-वार उपस्थिति रिपोर्ट, कुल मतदान प्रतिशत और प्रपत्र 17 ए (मतदाताओं की पंजी) तथा प्रपत्र 17 सी (मतों का अभिलेख/खाता) की सत्यापित प्रतियां मांगकर मतदान की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
तीसरा बिंदु विभिन्न निर्वाचन अभिलेखों की सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीसीटीवी रिकॉर्ड, वेबकास्टिंग डेटा, ईवीएम, वीवीपैट मूवमेंट रजिस्टर, मॉक पोल प्रमाणपत्र और प्रेजाइडिंग ऑफिसरों की डायरियों को नियम 94 व 95 के तहत संरक्षित रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है, ताकि भविष्य में किसी भी न्यायिक प्रक्रिया या स्क्रूटनी की आवश्यकता पड़ने पर ये दस्तावेज उपलब्ध रह सकें।चौथी मांग वीवीपैट पर्चियों से संबंधित है। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र के 5 प्रतिशत वीवीपैट स्लिप्स की पुनर्गणना कराने की आवश्यकता बताई है, ताकि ईवीएम और वीवीपैट के बीच तालमेल की पुष्टि हो सके और मतदाताओं का भरोसा मजबूत बना रहे।
पांचवें बिंदु में उन्होंने ईवीएम-वीवीपैट की बैटरी की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट देने का आग्रह किया है। मतदान पूर्व, मतदान के दौरान और मतदान के बाद बैटरी प्रतिशत का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए, ताकि तकनीकी गड़बड़ी की किसी भी आशंका को खत्म किया जा सके।अंत में, उन्होंने नियम 93 के अनुरूप उपलब्ध सभी निर्वाचन अभिलेखों के निरीक्षण तथा प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की अनुमति मांगी है।
पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता भारतीय लोकतंत्र की नींव है। जनता तभी भरोसा करती है जब प्रशासन सभी प्रक्रियाओं को खुला और जवाबदेह रखे।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला निर्वाचन पदाधिकारी इस विस्तृत और संवेदनशील आवेदन पर कितनी शीघ्र कार्रवाई करते हैं, क्योंकि यह मसला न सिर्फ एक प्रत्याशी का, बल्कि पूरे निर्वाचन तंत्र की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है।
