हिंदी के भविष्य से लेकर साहित्य की नई पीढ़ी तक, कवि गोष्ठी में उठे सवाल
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर स्थानीय हरि जी के हाता स्थित बिस्मिल्लाह खां संगीत एकेडमी में प्रगतिशील लेखक संघ, बक्सर के तत्वावधान में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी की वर्तमान स्थिति, साहित्य के प्रति नई पीढ़ी की घटती रुचि और विद्यालय स्तर पर कला-साहित्य को बढ़ावा देने की जरूरत पर गंभीर विमर्श हुआ।

__ हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर प्रगतिशील लेखक संघ की पहल, कवियों ने रचनाओं के जरिए भाषा और समाज के बदलते सरोकारों को किया अभिव्यक्त
केटी न्यूज/डुमरांव।
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर स्थानीय हरि जी के हाता स्थित बिस्मिल्लाह खां संगीत एकेडमी में प्रगतिशील लेखक संघ, बक्सर के तत्वावधान में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी की वर्तमान स्थिति, साहित्य के प्रति नई पीढ़ी की घटती रुचि और विद्यालय स्तर पर कला-साहित्य को बढ़ावा देने की जरूरत पर गंभीर विमर्श हुआ। कविताओं के माध्यम से कवियों ने भाषा, समाज और बदलते मानवीय रिश्तों से जुड़े सवालों को भी स्वर दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता चर्चित कवयित्री सह शिक्षिका मीरा सिंह 'मीरा' ने की, जबकि संचालन प्रगतिशील लेखक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. बीएल प्रवीण ने किया। डॉ. प्रवीण ने हिंदी को अब तक राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिलने को लेकर चिंता जताई।

उन्होंने हिंदी के विकास से जुड़ी पुरानी बहस का उल्लेख करते हुए कहा कि भाषा की व्यापक स्वीकार्यता के लिए उसकी सहजता और एकरूपता महत्वपूर्ण है।गोष्ठी में साहित्य से नई पीढ़ी की बढ़ती दूरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। एक्सपोर्ट व्यवसाय से जुड़े रोहित रहस्य ने कहा कि युवाओं में साहित्य के प्रति रुचि कम होने के पीछे शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताएं भी जिम्मेदार हैं। रोजगार की प्रतिस्पर्धा में कला और साहित्य जैसे विषयों को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच और संवेदनशीलता को दिशा देने वाला आधार भी है।

महारानी उषा रानी बालिका उच्च विद्यालय की सेवानिवृत्त प्राचार्या पुष्पा कुमारी ने विद्यालय स्तर पर साहित्य एवं कला से जुड़ी प्रतियोगिताएं नियमित रूप से कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों में रचनात्मकता और संवेदनशीलता विकसित करने के लिए स्कूलों में ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देना जरूरी है।कवि गोष्ठी में रामयश सिंह, रोहित राय, मीरा सिंह 'मीरा', खुर्शीद आलम, डॉ. बीएल प्रवीण समेत अन्य कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। मीरा सिंह की कविता 'बात समझना' को विशेष सराहना मिली। उनकी कविता में सुख-दुख, जीवन की बाधाओं और बदलते रिश्तों को संवेदनशील ढंग से उकेरा गया।कार्यक्रम में सेवानिवृत्त डीएसपी लालधारी प्रसाद, सेवानिवृत्त शिक्षक भृगुनाथ यादव, प्रियरंजन राय, कुमारी सुमन, डॉ. विश्वनाथ सिंह समेत कई साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

