गोकुल जलाशय बना बक्सर की पहचान, प्रवासी पक्षियों का महाकुंभ और जैव विविधता का जीवित संग्रहालय

बक्सर जिले के गोकुल जलाशय को प्राकृतिक धरोहर के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। बुधवार को जिलाधिकारी साहिला ने गोकुल जलाशय के विकास से संबंधित विभिन्न कार्यों का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गोकुल जलाशय को आर्द्रभूमि जैव विविधता का “जीवित संग्रहालय” बताते हुए कहा कि यह स्थल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पक्षी विशेषज्ञों और बर्डवॉचर्स के लिए भी अनूठा आकर्षण है।

गोकुल जलाशय बना बक्सर की पहचान, प्रवासी पक्षियों का महाकुंभ और जैव विविधता का जीवित संग्रहालय

-- जिलाधिकारी साहिला ने किया विकास कार्यों का निरीक्षण, संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

केटी न्यूज/बक्सर

बक्सर जिले के गोकुल जलाशय को प्राकृतिक धरोहर के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। बुधवार को जिलाधिकारी साहिला ने गोकुल जलाशय के विकास से संबंधित विभिन्न कार्यों का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गोकुल जलाशय को आर्द्रभूमि जैव विविधता का “जीवित संग्रहालय” बताते हुए कहा कि यह स्थल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पक्षी विशेषज्ञों और बर्डवॉचर्स के लिए भी अनूठा आकर्षण है।

गोकुल जलाशय ब्रह्मपुर एवं चक्की अंचल में विस्तारित है। निरीक्षण के दौरान जानकारी दी गई कि अंचल चक्की क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी मौजों का सीमांकन कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जबकि ब्रह्मपुर अंचल में शेष सीमांकन का कार्य प्रगति पर है। जिलाधिकारी ने भूमि सुधार उप समाहर्ता डुमरांव को निर्देश दिया कि वे अपने प्रत्यक्ष अनुश्रवण में शेष सीमांकन कार्य को शीघ्र पूरा कराना सुनिश्चित करें। वहीं, कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य प्रमंडल बक्सर को जलाशय के समीप संपर्क पथ की मरम्मति कराने का निर्देश दिया गया, ताकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सके।

वन प्रमंडल पदाधिकारी बक्सर ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि गोकुल जलाशय के समीप रेस्क्यू सेंटर, इंटरप्रिटेशन सेंटर, टूरिस्ट हब, वॉच टावर और गेस्ट हाउस जैसे आधारभूत ढांचों के निर्माण की कार्य योजना तैयार की जा रही है। इन संरचनाओं के निर्माण से यह स्थल इको-टूरिज्म के रूप में विकसित होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।जिलाधिकारी ने बताया कि गोकुल जलाशय में प्रतिवर्ष प्रवासी पक्षियों का “महाकुंभ” लगता है। यहां 65 प्रजातियों के लगभग 3500 प्रवासी पक्षी हर साल पहुंचते हैं। इनमें नॉर्दर्न शोवलर, गार्गेनी, रूडी शेलडक, ऑस्प्रे, केस्ट्रेल, सैंडपाइपर, येलो वैगटेल के साथ-साथ दुर्लभ प्रजातियों में शामिल इजिप्शियन वल्चर (सफेद गिद्ध) भी प्रमुख हैं।

बिहार में वर्ष 2022 से लगातार सबसे अधिक प्रवासी पक्षी प्रजातियां गोकुल जलाशय क्षेत्र में दर्ज की जा रही हैं, जो इसकी जैविक समृद्धि को दर्शाता है।निरीक्षण के क्रम में यह भी सामने आया कि जलाशय के आसपास आधारभूत संरचना निर्माण में बाधा बन रहे कुछ रैयतों की जमाबंदी अंचल कार्यालय चक्की में संचालित है। जिलाधिकारी ने भूमि सुधार उप समाहर्ता डुमरांव को निर्देश दिया कि विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाते हुए जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए, ताकि निर्माण कार्य समय पर प्रारंभ हो सके।पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर जिलाधिकारी ने गंभीर चिंता जताई। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कुछ स्थानीय ग्रामीण नदी में अपशिष्ट पदार्थ और मूर्ति विसर्जन कर रहे हैं, जिससे जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो सकता है।

इस पर अंचलाधिकारी चक्की और भूमि सुधार उप समाहर्ता डुमरांव को निर्देश दिया गया कि अपशिष्ट प्रवाह के लिए आसपास के क्षेत्रों में कृत्रिम तालाब का निर्माण कराया जाए, ताकि नदियों और जलाशय की पारिस्थितिकी सुरक्षित रह सके।जिलाधिकारी ने कहा कि आर्द्रभूमि पृथ्वी के जलवायु संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। यह जल शुद्धिकरण, बाढ़ नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण में सहायक होती है। गोकुल जलाशय को रामसर स्थल के रूप में घोषित किया जाना इसकी अंतरराष्ट्रीय महत्ता को भी रेखांकित करता है।गोकुल जलाशय में जलकुंभी की नियमित सफाई और खुले जल क्षेत्र के कारण यह पक्षियों के लिए आदर्श आश्रय स्थल बन चुका है। वेटलैंड के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन और वन प्रमंडल द्वारा विशेष पहल की जा रही है।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर 2 फरवरी को विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को गोकुल जलाशय का भ्रमण कराया जाएगा और उन्हें वेटलैंड से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। इस कार्यक्रम के लिए नोडल पदाधिकारी नमामि गंगे को सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी डुमरांव, अंचलाधिकारी ब्रह्मपुर, अंचलाधिकारी चक्की सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन का मानना है कि सुनियोजित विकास और संरक्षण के माध्यम से गोकुल जलाशय आने वाले समय में बक्सर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार की पहचान बनेगा।