छात्र जीवन में अनुशासन ही सफलता की नींव है - डीएसपी संजय
छात्र जीवन में अनुशासन सफलता की नींव है, जो चरित्र निर्माण, एकाग्रता और समय प्रबंधन के द्वारा विद्यार्थियों को महान बनाती है। यह नियमितता, बड़ों का सम्मान और लक्ष्यों के प्रति समर्पण सिखाता है, जिससे छात्र मानसिक-शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रहते हैं और चुनौतियों को अवसरों में बदलते हैं। यह बातें राइजिंग सन इंटरनेशनल स्कूल डुमरांव में कोलकात्ता पुलिस में डीएसपी के पद पर तैनात संजय कुमार ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधन के दौरान कही।
-- राइजिंग सन इंटरनेशनल स्कूल डुमरांव में कोलकात्ता पुलिस के डीएसपी संजय कुमार ने छात्रों को किया संबोधित
-- बोले डीएसपी छात्र-अभिभावकों के अनुशासन को दबाव मान बैठते है माता-पिता, बच्चों की भलाई और सुरक्षा के लिए सिखाते हैं अनुशासन के नियम
केटी न्यूज/डुमरांव
छात्र जीवन में अनुशासन सफलता की नींव है, जो चरित्र निर्माण, एकाग्रता और समय प्रबंधन के द्वारा विद्यार्थियों को महान बनाती है। यह नियमितता, बड़ों का सम्मान और लक्ष्यों के प्रति समर्पण सिखाता है, जिससे छात्र मानसिक-शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रहते हैं और चुनौतियों को अवसरों में बदलते हैं। यह बातें राइजिंग सन इंटरनेशनल स्कूल डुमरांव में कोलकात्ता पुलिस में डीएसपी के पद पर तैनात संजय कुमार ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधन के दौरान कही। डीएसपी कुमार ने कहा कि अक्सर छात्र अनुशासन को एक दबाव के रूप में देखते हैं और इसे अनावश्यक मानते हैं। वे इसके पीछे छिपे सकारात्मक उद्देश्यों को नहीं समझ पाते।माता-पिता बच्चों की भलाई और सुरक्षा के लिए अनुशासन के नियम सिखाते हैं।

अनुशासन बनाए रखने के कई सरल तरीके हैं, जैसे जल्दी सोना और जल्दी उठना व्यक्ति को स्वस्थ्य और बुद्धिमान बनाता है। ऐसी आदतें आपके स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है। इसी तरह, खाने से पहले हाथ धोना, खाते समय बात न करना और शिष्ट व्यवहार करना अनुशासन के छोटे-छोटे पहलू हैं, जिनका नियमित पालन जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।अनुशासन का अर्थ है अपने कार्यों को नियमों और समय के अनुसार करना। एक छात्र के जीवन में अनुशासन उसकी सफलता की नींव है। माता-पिता और शिक्षक ही सबसे पहले इसे सिखाते हैं। समय पर उठना, पढ़ाई करना, होमवर्क पूरा करना और खेल-कूद में भाग लेना, ये सभी छोटे-छोटे नियम छात्र में अनुशासन पैदा करते हैं।

डीएसपी संजय कुमार ने कहा कि अनुशासन केवल नियमों का पालन नहीं है, बल्कि यह एक जिम्मेदारी का भाव भी सिखाता है। अनुशासित छात्र समय का सही उपयोग करता है, ध्यान केंद्रित रहता है और अपने लक्ष्यों की ओर निरंतर प्रयास करता है। यह उन्हें आत्मनिर्भर और सकारात्मक बनाता है।डीएसपी कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए बोले कि अनुशासन से छात्र अपने अध्ययन, खेल और अन्य गतिविधियों में संतुलन बनाए रखते हैं। एक अनुशासित छात्र समय पर पढ़ाई करता है, होमवर्क पूरा करता है और व्यर्थ कार्य को करने से बचता है। इससे उनकी आत्मनिर्भरता, ईमानदारी और समर्पण की भावना बढ़ती है। अनुशासन केवल व्यक्तिगत विकास ही नहीं करता, बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी बनता है।

समाज स्वाभाविक रूप से उन छात्रों की सराहना करता है, जो अपने जीवन में अनुशासन अपनाते हैं।अनुशासन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। एक छात्र जो समय पर भोजन करता है, पर्याप्त नींद लेता है और नियमित व्यायाम करता है, वह न केवल स्वस्थ रहता है बल्कि पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन करता है। अनुशासन आत्म-नियंत्रण विकसित करता है, जिससे छात्र अपने व्यवहार और शब्दों पर नियंत्रण रख पाता है और दूसरों के प्रति विनम्र और आदर्श बनता है।
