गुरु पूर्णिमा आज: ज्ञान, श्रद्धा और गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता का महापर्व

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर शनिवार को गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) श्रद्धा, आस्था और गुरु परंपरा के प्रति समर्पण भाव के साथ मनाई जाएगी। विद्वानों के अनुसार इसी दिन महर्षि पराशर के पुत्र एवं भारतीय सनातन परंपरा के महान ऋषि भगवान वेदव्यास का अवतरण हुआ था।

गुरु पूर्णिमा आज: ज्ञान, श्रद्धा और गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता का महापर्व

__ महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है व्यास पूर्णिमा, गुरु पूजन से त्रिदेवों की आराधना के समान मिलता है पुण्य

केटी न्यूज/रजनीकांत दूबे/बक्सर

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर शनिवार को गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) श्रद्धा, आस्था और गुरु परंपरा के प्रति समर्पण भाव के साथ मनाई जाएगी। विद्वानों के अनुसार इसी दिन महर्षि पराशर के पुत्र एवं भारतीय सनातन परंपरा के महान ऋषि भगवान वेदव्यास का अवतरण हुआ था। वेदों का विभाजन, महाभारत, ब्रह्मसूत्र तथा अठारह पुराणों की रचना का श्रेय वेदव्यास को ही प्राप्त है। इसी कारण उन्हें गुरुओं का भी गुरु माना जाता है और यह पर्व व्यास पूजा के रूप में भी प्रसिद्ध है।विद्वत परिषद, बक्सर के आचार्य पंडित नरोत्तम द्विवेदी ने बताया कि गुरु पूर्णिमा केवल किसी व्यक्ति विशेष का सम्मान नहीं, बल्कि गुरु के माध्यम से ज्ञान, ब्रह्मज्ञान और परमात्मा की आराधना का पर्व है।

शास्त्रों में कहा गया है— "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरु: साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।" यह श्लोक गुरु को साक्षात् परब्रह्म के स्वरूप के रूप में स्थापित करता है।उन्होंने बताया कि वेदव्यास का एक नाम कृष्ण द्वैपायन भी है। द्वीप में जन्म लेने के कारण उन्हें द्वैपायन तथा श्याम वर्ण होने से कृष्ण द्वैपायन कहा गया। बद्रिकाश्रम में तपस्या करने के कारण उनका नाम बादरायण भी प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने कहा कि विश्व के अनेक धर्मग्रंथों में विद्यमान सात्विक और कल्याणकारी विचार प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से वेदव्यास के ज्ञान से प्रभावित हैं। इसी कारण कहा जाता है— "व्यासोच्छिष्टं जगत्सर्वम्।"आचार्य द्विवेदी ने कहा कि गुरु वही है जो शिष्य के जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर कर ज्ञान रूपी अमृत का संचार करे तथा धर्म और शास्त्रों के गूढ़ रहस्यों का बोध कराए।

गुरु ही साधक को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं और जीवन को संयम, शांति, मधुरता एवं आध्यात्मिक उन्नति की दिशा प्रदान करते हैं।उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने धर्मगुरु, शिक्षागुरु एवं जीवन में मार्गदर्शन देने वाले सभी गुरुजनों का श्रद्धा एवं भक्ति के साथ पूजन करें। मान्यता है कि इस दिन गुरु की आराधना करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा के समान पुण्य प्राप्त होता है। भगवान श्रीराम भी प्रतिदिन अपने माता-पिता और गुरु को प्रणाम कर आदर्श जीवन का संदेश देते थे। गुरु पूर्णिमा का यह पर्व भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता, संस्कार और ज्ञान परंपरा का अद्वितीय प्रतीक माना जाता है।