खबर का असर: शिक्षा विभाग की टूटी तंद्रा, सफाई घोटाले की जांच को तीन सदस्यीय टीम गठित

सरकारी विद्यालयों में साफ-सफाई कार्य के नाम पर कथित वित्तीय घोटाले को लेकर प्रकाशित केटी न्यूज खबर का आखिरकार असर दिखने लगा है। मिलते-जुलते नाम वाली कंपनियों के जरिये दो वर्षों से चल रहे कथित खेल को लेकर शिक्षा विभाग की नींद टूटी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) संदीप रंजन ने जांच और कार्रवाई के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दिया है।

खबर का असर: शिक्षा विभाग की टूटी तंद्रा, सफाई घोटाले की जांच को तीन सदस्यीय टीम गठित

-- एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश, तथाकथित शिक्षा माफियाओं की भूमिका पर टिकी निगाहें

केटी न्यूज/बक्सर।

सरकारी विद्यालयों में साफ-सफाई कार्य के नाम पर कथित वित्तीय घोटाले को लेकर प्रकाशित केटी न्यूज खबर का आखिरकार असर दिखने लगा है। मिलते-जुलते नाम वाली कंपनियों के जरिये दो वर्षों से चल रहे कथित खेल को लेकर शिक्षा विभाग की नींद टूटी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) संदीप रंजन ने जांच और कार्रवाई के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दिया है।डीईओ द्वारा गठित इस समिति में योजना एवं लेखा डीपीओ चंदन कुमार द्विवेदी, स्थापना डीपीओ रजनीश उपाध्याय तथा बक्सर सदर प्रखंड के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी राजेश राम को शामिल किया गया है। तीनों अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर पूरे मामले की गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को समर्पित करें।

-- खबर के बाद हरकत में आया विभाग

गौरतलब है कि केटी न्यूज में प्रकाशित रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि जिस एजेंसी फर्स्ट आईडिया डिजिटल एप्लीकेशन प्राइवेट लिमिटेड का चयन विभागीय स्तर पर किया गया था, कार्यादेश और भुगतान उससे अलग नाम वाली कंपनी फर्स्ट आईडिया डिजिटल्स एप्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड को किया जा रहा है। दोनों कंपनियों का जीएसटी, पैन और सीआईएन नंबर तक अलग-अलग होना इस पूरे प्रकरण को और भी संदिग्ध बनाता है।खबर छपने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। सूत्रों की मानें तो मामला मीडिया में आने के बाद ही विभागीय स्तर पर गंभीरता से संज्ञान लिया गया, जिससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि यदि खबर प्रकाशित नहीं होती तो क्या यह कथित खेल यूं ही चलता रहता।

-- गहराई से जांच हुई तो खुलेंगे राज, बेनकाब होंगे कई बड़े चेहरे

शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और गहराई से की गई, तो इस पूरे खेल के पीछे सक्रिय तथाकथित शिक्षा माफियाओं की करतूत खुलकर सामने आ सकती है। बताया जा रहा है कि वर्षों से शिक्षा विभाग में ठेके, आपूर्ति और योजनाओं के नाम पर माफियागिरी का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय रहा है, जो अपने प्रभाव और दबाव के बल पर विभागीय अधिकारियों से मनचाहे फैसले कराता रहा है। जानकारों का कहना है कि पारदर्शी तरीके से जांच होने पर कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते है। 

-- पारदर्शिता की अग्निपरीक्षा

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गठित जांच टीम कितनी पारदर्शिता और ईमानदारी से जांच करती है। क्या जांच केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी या फिर वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्रवाई होगी, यह पहली बार नहीं है जब बक्सर शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा हो। अतीत में भी कई मामलों में जांच हुई, लेकिन नतीजे अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहे।

-- एक सप्ताह बाद खुलेगा सच

फिलहाल जिले की निगाहें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं। एक सप्ताह बाद आने वाली रिपोर्ट यह तय करेगी कि यह मामला महज प्रशासनिक चूक था या फिर करोड़ों के संभावित घोटाले की सुनियोजित साजिश। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि शिक्षा विभाग इस बार भ्रष्टाचार के खिलाफ कितनी मजबूती से खड़ा होता है, या फिर पुरानी कहानी एक बार फिर दोहराई जाएगी।