आस्था का केंद्र बना डुमरांव राजगढ़ चौक का मां काली मंदिर, बुधवार को होगा भव्य वार्षिकोत्सव

डुमरांव राजगढ़ चौक स्थित मां काली मंदिर का वार्षिकोत्सव बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के माहौल में मनाया जाएगा। वार्षिक पूजन उत्सव को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां काली की विशेष पूजा-अर्चना शुरू होगी।

आस्था का केंद्र बना डुमरांव राजगढ़ चौक का मां काली मंदिर, बुधवार को होगा भव्य वार्षिकोत्सव

__ डुमरांव के अग्रणी व्यवसायी पन्नालाल जायसवाल ने कराया है मंदिर का निर्माण, वार्षिकोत्सव के पूर्व संध्या से ही बह रही है भक्ति रस की अविरल धारा 

रजनीकांत दूबे/डुमरांव।

डुमरांव राजगढ़ चौक स्थित मां काली मंदिर का वार्षिकोत्सव बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के माहौल में मनाया जाएगा। वार्षिक पूजन उत्सव को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां काली की विशेष पूजा-अर्चना शुरू होगी। इसके बाद महाआरती और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।मंदिर के निर्माता और डुमरांव के अग्रणी व्यवसायी पन्नालाल जायसवाल ने बताया कि वार्षिक पूजन उत्सव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां काली की विशेष पूजा की जाएगी। देर शाम भव्य महाआरती का आयोजन होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। पूर्व संध्या से ही मंदिर के ध्वनि विस्तारक यंत्रों से बज रहे मांगलिक और देवी गीतों से शहर में भक्ति रस की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है।

__ पन्नालाल के लिए मंदिर से जुड़ी है खास आस्था

राजगढ़ चौक स्थित मां काली मंदिर पन्नालाल जायसवाल के लिए महज एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनकी आस्था और जीवन साधना का प्रतीक है। मंदिर के निर्माण से लेकर इसके सौंदर्यीकरण तक उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पन्नालाल जायसवाल बताते हैं कि मंदिर से उनका विशेष लगाव है और वे अपनी जीवनभर की कमाई का बड़ा हिस्सा इसके निर्माण, विस्तार और सौंदर्यीकरण में लगाते आ रहे हैं।कभी छोटा सा मंदिर रहे इस धार्मिक स्थल को पन्नालाल जायसवाल ने अपनी पारिवारिक भूमि का हिस्सा समर्पित कर भव्य स्वरूप प्रदान किया। आज राजगढ़ चौक स्थित मां काली मंदिर डुमरांव की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। दूर-दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।

__ मंदिर निर्माण से धार्मिक आयोजनों तक का सफर

पन्नालाल जायसवाल का धार्मिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़ाव नया नहीं है। उन्होंने डुमरांव स्टेशन रोड स्थित अंजान ब्रह्मबाबा मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ इस दिशा में कार्य शुरू किया। वर्ष 1982 में डुमरांव राजगढ़ स्थित हनुमान मंदिर का भी जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद नगर पंचित काली मंदिर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। काव नदी पार कर मंदिर पहुंचने में होने वाली परेशानी को देखते हुए वहां पुल निर्माण कराने के साथ मंदिर का भव्य स्वरूप तैयार कराया गया। आज वह स्थल धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक कार्यक्रमों का भी केंद्र बन चुका है।पन्नालाल जायसवाल का कहना है कि मंदिर केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि आस्था का आधार और समाज को जोड़ने वाली डोर है। यही सोच उनके धार्मिक कार्यों की प्रेरणा रही है। बुधवार को होने वाला मां काली मंदिर का वार्षिकोत्सव इसी आस्था और सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाएगा।