मानसिक रूप से दिव्यांग युवक बना साइबर माफिया का ‘मोहरा’, करोड़ों की ठगी का नेटवर्क बेनकाब
बक्सर जिले में साइबर अपराध का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न केवल बैंकिंग व्यवस्था बल्कि ग्रामीण स्तर पर सक्रिय साइबर गिरोहों की जड़ों को भी उजागर कर दिया है। मानसिक रूप से कमजोर युवक के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन किए जाने का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि पूरे नेटवर्क की परतें अभी खुलनी बाकी हैं।
-- सरकारी योजनाओं और लोन के नाम पर खुलवाए खाते, एसआईटी जांच में बड़े रैकेट के संकेत, आरोपित गिरफ्तार
केटी न्यूज/बक्सर
बक्सर जिले में साइबर अपराध का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न केवल बैंकिंग व्यवस्था बल्कि ग्रामीण स्तर पर सक्रिय साइबर गिरोहों की जड़ों को भी उजागर कर दिया है। मानसिक रूप से कमजोर युवक के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन किए जाने का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि पूरे नेटवर्क की परतें अभी खुलनी बाकी हैं।मामले का खुलासा 9 फरवरी को तब हुआ, जब संजीत कुमार कुशवाहा ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके छोटे भाई हेमंत कुमार, जो मानसिक रूप से कमजोर हैं, को गांव के दो युवकों ने सरकारी लोन दिलाने का झांसा दिया।

भरोसे में लेकर उनके नाम पर दो अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए गए और सिम कार्ड भी जारी करा लिया गया। हैरानी की बात यह है कि खाते से संबंधित कोई दस्तावेज या लेन-देन की जानकारी हेमंत या उनके परिवार को नहीं दी गई।तकनीकी जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। इन खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुआ है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह रकम विभिन्न साइबर ठगी की घटनाओं से जुड़ी हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना में कांड संख्या 07/2026 दर्ज कर एसपी के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया।जांच के दौरान इटाढ़ी थाना क्षेत्र के बैरी गांव निवासी अनमोल तिवारी को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि गिरोह का काम भोले-भाले और जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजना, लोन या आर्थिक मदद का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाना था।

इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर और निकालने के लिए किया जाता था।यह मामला कई सवाल भी खड़े करता है, क्या बैंक खाते खोलते समय उचित सत्यापन हुआ, मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति के नाम पर खाता खोलने में किन दस्तावेजों का उपयोग किया गया, क्या बैंकिंग सिस्टम की लापरवाही ने इस गिरोह को खुली छूट दी।फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। आम लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपने बैंक दस्तावेज, आधार कार्ड या सिम कार्ड की जानकारी न दें और लोन या सरकारी योजना के नाम पर मिलने वाले झांसे से सतर्क रहे।

