डुमरांव में सामाजिक समरसता का संदेश, महाकाल मंदिर परिसर में जुटे सैकड़ों लोग
नगर के महाकाल मंदिर ट्रेनिंग स्कूल के समीप स्थित महाकाल मंदिर परिसर रविवार को सामाजिक एकता और समरसता के स्वर से गूंज उठा। सकल हिन्दू समाज के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में 500 से अधिक लोगों ने भाग लिया। विभिन्न जाति एवं समुदायों से आए लोगों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया।
__ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और बौद्धिक सत्र के जरिए एकता व संगठन पर दिया गया जोर
केटी न्यूज/डुमरांव
नगर के महाकाल मंदिर ट्रेनिंग स्कूल के समीप स्थित महाकाल मंदिर परिसर रविवार को सामाजिक एकता और समरसता के स्वर से गूंज उठा। सकल हिन्दू समाज के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में 500 से अधिक लोगों ने भाग लिया। विभिन्न जाति एवं समुदायों से आए लोगों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता लालू ओझा ने की, जबकि संचालन अमित कुमार ने किया। आयोजन की शुरुआत भजन-संगीत से हुई, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।

विनय मिश्रा और दीपक पाण्डेय ने भजन प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया।सम्मेलन का मुख्य आकर्षण बौद्धिक सत्र रहा, जिसमें वक्ताओं ने सामाजिक संगठन, आपसी समन्वय और सांस्कृतिक मूल्यों पर विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में आयोजित हो रहे विभिन्न सामाजिक आयोजनों की जानकारी भी साझा की गई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर संवाद और सहयोग की भावना को मजबूत करना है।

इस अवसर पर संघ के विभाग प्रचारक राणा प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में संगठन और सांस्कृतिक चेतना की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। जिला प्रचारक अभिषेक भारती ने भी सामाजिक सहभागिता को समय की आवश्यकता बताया।कार्यक्रम में नगर संचालक बीरेंद्र राय, भिखारी पाल, महान तिवारी, जितेंद्र तिवारी, दिनेश पाठक, रघुवर सिंह, रमेश केसरी, राज किशोर सिंह, संजय चौबे, बलराम सिंह, सुनील सिद्धार्थ, संजय साह, मंटू जी, पिंकी पाठक, मनोज पाठक, सुनील कुमार शिशु और प्रहलाद वर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

आयोजकों के अनुसार सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरूकता और आपसी सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।समापन के दौरान आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में आपसी विश्वास और एकजुटता को और मजबूती मिल सके।

