नेनुआ बना ‘मिनी ब्रज’, फाग की तान पर थिरका गांव
डुमरांव प्रखंड के कुशलपुर पंचायत अंतर्गत नेनुआ गांव रविवार को सचमुच ‘मिनी ब्रज’ में तब्दील नजर आया। सुप्रसिद्ध रामबउरा बाबा के परिसर में आयोजित पारंपरिक फाग समारोह ने गांव की फिजा को भक्ति, रंग और लोकसंगीत से सराबोर कर दिया। जैसे ही ढोलक और मंजीरे की थाप पर ब्रज की होरी गूंजनी शुरू हुई, पूरा वातावरण “रंग बरसे” की जीवंत अनुभूति से भर उठा।
__ रामबउरा बाबा परिसर में लोकसंस्कृति का संगम, चार पंचायतों के कलाकारों का सम्मान, गुलाब और अबीर से महका माहौल
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव प्रखंड के कुशलपुर पंचायत अंतर्गत नेनुआ गांव रविवार को सचमुच ‘मिनी ब्रज’ में तब्दील नजर आया। सुप्रसिद्ध रामबउरा बाबा के परिसर में आयोजित पारंपरिक फाग समारोह ने गांव की फिजा को भक्ति, रंग और लोकसंगीत से सराबोर कर दिया। जैसे ही ढोलक और मंजीरे की थाप पर ब्रज की होरी गूंजनी शुरू हुई, पूरा वातावरण “रंग बरसे” की जीवंत अनुभूति से भर उठा।कार्यक्रम की शुरुआत ब्रज की पारंपरिक होरी से हुई। कलाकारों ने जब “बृज में हरी होरी मचाई…” की तान छेड़ी तो श्रोता भावविभोर हो उठे। राधा-कृष्ण की रसमय झलकियों से सजे फाग गीतों ने उपस्थित लोगों को आध्यात्मिक आनंद का एहसास कराया।

गुलाब की पंखुड़ियों और अबीर-गुलाल की खुशबू ने पूरे परिसर को महका दिया।इस सांस्कृतिक आयोजन का नेतृत्व भाजपा नेता विन्ध्याचल पाठक ने किया। उनके संयोजन में चार पंचायतों से आए लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोलक, झाल और मंजीरे की संगत पर गाए गए पारंपरिक फाग गीतों ने गांव की सांस्कृतिक विरासत को सजीव कर दिया। कार्यक्रम में भाजपा नेत्री स्वेता पाठक ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी प्रेम का संदेश देने वाला पर्व है। उन्होंने कहा कि गांवों में फाग गाने की परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जिसे सहेजना हम सबकी जिम्मेदारी है।

समारोह का एक विशेष आकर्षण कलाकार सम्मान रहा। आयोजन समिति की ओर से सभी प्रतिभागी कलाकारों को अंगवस्त्र और शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर कलाकारों के चेहरे गर्व से खिल उठे। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से लोककला को नई ऊर्जा मिलती है और युवा पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ती है।कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही। महिलाओं और युवाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। फाग की सुरमयी तान और होली के रंगों ने नेनुआ को उत्सवधर्मी रंग में रंग दिया।रविवार का यह आयोजन सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परंपरा, श्रद्धा और सामाजिक एकता का उत्सव बन गया। नेनुआ की गलियों में देर तक फाग की गूंज सुनाई देती रही और गांववासियों के चेहरे पर होली की खुशी साफ झलकती रही।

