शनिवासरीय जनता दरबार में सीओ से भिड़ा एक पक्ष, गंभीर हो गई थी स्थिति
डुमरांव अंचल कार्यालय शनिवार को उस समय विवाद का केंद्र बन गया, जब नया भोजपुर जदीद स्थित 52 कट्ठा पुश्तैनी जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहे पुराने विवाद की सुनवाई अचानक हंगामे में बदल गई। जमीन के वारिसों के बीच वर्षों से चले आ रहे इस विवाद में अब प्रशासनिक कार्रवाई, प्राथमिकी की चेतावनी और निष्पक्षता पर सवाल जुड़ गए हैं।
-- नया भोजपुर जदीद की पुश्तैनी जमीन पर दावा-प्रतिदावा, सुनवाई के दौरान प्रभारी सीओ से तीखी नोकझोंक, निष्पक्षता पर उठे सवाल
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव अंचल कार्यालय शनिवार को उस समय विवाद का केंद्र बन गया, जब नया भोजपुर जदीद स्थित 52 कट्ठा पुश्तैनी जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहे पुराने विवाद की सुनवाई अचानक हंगामे में बदल गई। जमीन के वारिसों के बीच वर्षों से चले आ रहे इस विवाद में अब प्रशासनिक कार्रवाई, प्राथमिकी की चेतावनी और निष्पक्षता पर सवाल जुड़ गए हैं।मामला स्व. मोहम्मद हसन खान और उनके सगे भाई स्व. मोहम्मद अली हसन की पुश्तैनी संपत्ति से जुड़ा है। दोनों भाइयों के निधन के बाद जमीन का विवाद उनके वारिसों के बीच गहराता चला गया। शनिवार को नया भोजपुर थाना द्वारा जारी नोटिस के तहत अंचल कार्यालय में प्रभारी सीओ कुमार दिनेश की मौजूदगी में दोनों पक्षों की सुनवाई होनी थी।लेकिन सुनवाई शुरू होते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया।पहले पक्ष की ओर से स्व. मोहम्मद हसन खान की पत्नी रजिया खातून और उनकी सात पुत्रियां उपस्थित रहीं।

उनका दावा है कि 52 कट्ठा जमीन में उन्हें कानूनी रूप से आधा हिस्सा यानी 26 कट्ठा मिलना चाहिए। रजिया खातून का कहना है कि ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में जमीन उनके नाम दर्ज है और उनके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं। आरोप है कि विरोधी पक्ष जबरन पूरी जमीन पर पिलर गाड़कर कब्जा करना चाहता है और बेटियों के कानूनी अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है।वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से स्वर्गीय मोहम्मद अली हसन के पुत्र शाहिद खान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया।उनका कहना है कि बंटवारे के दौरान पहले पक्ष को दूसरी जमीन दी गई थी, जिसे उन्होंने बाद में बेच दिया। शाहिद खान के अनुसार, फोरलेन के पास खाता संख्या 1314 और 1315 की जमीन पहले पक्ष के हिस्से में आई थी, और अब उसी जमीन को बेच देने के बाद वे 52 कट्ठा की इस जमीन पर दोबारा दावा कर रहे हैं।

उनका दावा है कि विवादित जमीन पर शुरू से उनके परिवार का दखल रहा है।विवाद उस समय और बढ़ गया, जब पिलर उखाड़ने को लेकर दोनों पक्षों में पहले से तनाव की बात सामने आई। यह मामला पहले ही नया भोजपुर थाना तक पहुंच चुका था। शनिवार की सुनवाई के दौरान प्रभारी सीओ का आरोप है कि दूसरे पक्ष के तीन युवक दस्तावेज मांगने पर प्रस्तुत नहीं कर पाए और एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे।सीओ के मुताबिक, इससे कार्यालय की कार्यप्रणाली बाधित हुई और सरकारी गरिमा को ठेस पहुंची, जिस कारण तीन लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।हालांकि, दूसरे पक्ष के मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद दानिश ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने न तो हंगामा किया और न ही किसी तरह की अभद्रता।

उन्होंने अंचल कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई फुटेज से सामने आ जाएगी। उनका आरोप है कि उन्हें अंचल कार्यालय से निष्पक्ष न्याय नहीं मिल रहा, इसलिए वे अब इस मामले को लेकर जिलाधिकारी से मिलने की तैयारी कर रहे हैं।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रशासनिक सुनवाई की पारदर्शिता और जमीनी विवादों के निष्पक्ष समाधान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेजों और दावों को सही बता रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस विवाद में निष्पक्ष जांच कर वर्षों पुराने इस जमीन विवाद का कानूनी और न्यायसंगत समाधान कैसे निकालता है।
बयान
एक पक्ष के तीन लोगों ने जमीन के दस्तावेज मांगे जाने पर हंगामा किया। वे लोग जानबूझकर सुनवाई में बाधा पहुंचा रहे थे तथा दूसरे पक्ष को मेरे सामने धमका रहे थे। तीनों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराएंगे। - कुमार दिनेश, प्रभारी सीओ, डुमरांव
