ओएसआर से आत्मनिर्भर पंचायतों की राह, प्रशिक्षण में उठी जवाबदेही की मांग

प्रखंड सभा कक्ष में जिला पंचायत संसाधन केंद्र एवं पंचायतीराज विभाग की ओर से मुखिया, पंचायत सचिव और कार्यपालक सहायकों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। प्रशिक्षण का मुख्य फोकस ग्राम पंचायतों को ऑन सोर्स रेवेन्यू (ओएसआर) के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना रहा, लेकिन पहले ही दिन उपस्थिति और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल भी उठे।

ओएसआर से आत्मनिर्भर पंचायतों की राह, प्रशिक्षण में उठी जवाबदेही की मांग

केटी न्यूज/राजपुर

प्रखंड सभा कक्ष में जिला पंचायत संसाधन केंद्र एवं पंचायतीराज विभाग की ओर से मुखिया, पंचायत सचिव और कार्यपालक सहायकों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। प्रशिक्षण का मुख्य फोकस ग्राम पंचायतों को ऑन सोर्स रेवेन्यू (ओएसआर) के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना रहा, लेकिन पहले ही दिन उपस्थिति और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल भी उठे।प्रशिक्षक ओमप्रकाश राम, दिनेश कुमार सिन्हा और धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि देश के कई राज्यों में पंचायतों ने ओएसआर के माध्यम से अपनी आय बढ़ाकर विकास कार्यों को गति दी है।

उन्होंने कहा कि केवल केंद्र और राज्य सरकार के अनुदान पर निर्भर रहने से विकास सीमित हो जाता है, जबकि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से पंचायतें स्थायी आय सृजित कर सकती हैं।प्रशिक्षकों ने तालाब, हाट-बाजार, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन जैसे स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन से आय बढ़ाने के उपाय बताए। साथ ही पेशेवर कर, मनोरंजन कर, बाजार शुल्क, जल एवं विद्युत कर, उपयोगिता शुल्क, जुर्माना एवं दंड शुल्क तथा कचरा संग्रहण पर उपयोगकर्ता शुल्क जैसे विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की गई।उनका कहना था कि इन उपायों से पंचायतें करोड़ों रुपये का ओएसआर संग्रह कर सकती हैं और विकास कार्यों को निरंतर एवं टिकाऊ बना सकती हैं।

हालांकि, प्रशिक्षण के दौरान कुछ कार्यपालक सहायकों और पंचायत सचिवों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई गई। कई मुखियाओं ने भी व्यवस्थागत कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए नियमित और प्रभावी मॉनिटरिंग की मांग की।कार्यक्रम में मुखिया अनिल सिंह, आनंद प्रकाश सिंह, जगलाल चौधरी, इंद्रावती देवी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रशिक्षण के जरिए पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने का संदेश तो दिया गया, लेकिन साथ ही जिम्मेदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत भी रेखांकित हुई।