निजी जमीन पर सरकारी पैसे से बनी पीसीसी सड़क, लोक शिकायत में खुला खेल

डुमरांव नगर परिषद में सरकारी राशि के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। वार्ड संख्या-33 के साफखाना रोड स्थित निजी मार्केट में कराए गए पीसीसी सड़क निर्माण को लेकर दायर परिवाद में लोक शिकायत निवारण कार्यालय ने गंभीर टिप्पणी करते हुए तत्कालीन कनीय अभियंता (जेई) सोनू कुमार और तत्कालीन सहायक अभियंता के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की है।

निजी जमीन पर सरकारी पैसे से बनी पीसीसी सड़क, लोक शिकायत में खुला खेल

--डुमरांव नगर परिषद के ईओ, जेई, संवेदक और वार्ड पार्षद पर मिलीभगत का आरोप, अधिकारी ने माना—“एक व्यक्ति विशेष को पहुंचाया गया लाभ”

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव नगर परिषद में सरकारी राशि के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। वार्ड संख्या-33 के साफखाना रोड स्थित निजी मार्केट में कराए गए पीसीसी सड़क निर्माण को लेकर दायर परिवाद में लोक शिकायत निवारण कार्यालय ने गंभीर टिप्पणी करते हुए तत्कालीन कनीय अभियंता (जेई) सोनू कुमार और तत्कालीन सहायक अभियंता के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की है।यह मामला परिवाद संख्या-530110106032610435, वर्ष-2026 से जुड़ा है, जिसे वार्ड संख्या-33 निवासी धीरज कुमार ने 6 मार्च 2026 को दायर किया था। परिवादी ने आरोप लगाया था कि नगर परिषद द्वारा नियमों को ताक पर रखकर निजी जमीन और निजी मार्केट में घटिया पीसीसी सड़क का निर्माण कराया गया, जिससे सिर्फ एक व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाया गया।

लोक शिकायत निवारण अधिकारी ने मामले की सुनवाई के दौरान नगर परिषद डुमरांव के कार्यपालक पदाधिकारी से प्रतिवेदन तलब किया था। नगर परिषद की ओर से दिए गए जवाब में स्वीकार किया गया कि वार्ड-33 में निजी रास्ते पर पीसीसी स्लैब निर्माण कराया गया था। मामले में तत्कालीन जेई सोनू कुमार से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।परिवादी द्वारा उपलब्ध कराए गए छह जियोटैग छायाचित्रों और नगर परिषद के प्रतिवेदन का अवलोकन करने के बाद लोक शिकायत निवारण अधिकारी ने अपने आदेश में साफ लिखा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि निजी जमीन में सड़क निर्माण कराया गया है, जो “किसी एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने हेतु सरकारी राशि का दुरुपयोग” है।

अधिकारी ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कहा कि परिवादी द्वारा लगाया गया आरोप सत्य पाया गया है। इसके बाद तत्कालीन कनीय अभियंता सोनू कुमार एवं तत्कालीन सहायक अभियंता के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए परिवाद को स्वीकृत कर मामले की कार्रवाई समाप्त कर दी गई। आदेश की प्रति जिला पदाधिकारी बक्सर को भी भेजी गई है।इस फैसले के बाद डुमरांव नगर परिषद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद के ईओ, जेई, संवेदक और वार्ड पार्षद की मिलीभगत से निजी लाभ के लिए सरकारी राशि खर्च की गई। अब पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।