लेबर कोड के खिलाफ उबाल: चौसा थर्मल प्लांट प्रभावित, बक्सर में सड़क पर उतरे मजदूर
केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ गुरुवार को बक्सर में मजदूर संगठनों का गुस्सा खुलकर सड़कों पर दिखाई दिया। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर आयोजित अखिल भारतीय आम हड़ताल का जिले में व्यापक असर देखने को मिला। हड़ताल के कारण चौसा स्थित थर्मल पावर प्लांट का कामकाज प्रभावित रहा, जबकि शहर के व्यस्त ज्योति चौक पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर प्रशासन और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
-- ज्योति चौक पर जाम, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में, निजीकरण और श्रम कानूनों में बदलाव के विरोध में ट्रेड यूनियनों का शक्ति प्रदर्शन
केटी न्यूज/बक्सर
केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ गुरुवार को बक्सर में मजदूर संगठनों का गुस्सा खुलकर सड़कों पर दिखाई दिया। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर आयोजित अखिल भारतीय आम हड़ताल का जिले में व्यापक असर देखने को मिला। हड़ताल के कारण चौसा स्थित थर्मल पावर प्लांट का कामकाज प्रभावित रहा, जबकि शहर के व्यस्त ज्योति चौक पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर प्रशासन और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।सुबह से ही विभिन्न श्रमिक संगठनों से जुड़े मजदूर चौसा थर्मल पावर प्लांट के बाहर जुटने लगे। काम ठप रहने से उत्पादन व्यवस्था पर असर पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चार नए लेबर कोड लागू कर केंद्र सरकार ने दशकों से चले आ रहे 29 श्रम कानूनों को खत्म कर दिया है, जिससे मजदूरों की सुरक्षा और अधिकार कमजोर होंगे।

राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) सहित कई ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए श्रमिकों की मांगों को रखा। यह ज्ञापन एसटीपीएल के एचआर हेड कुलदीप राज को सौंपा गया। ज्ञापन में श्रम कानूनों की बहाली, मनरेगा में किए गए बदलावों को वापस लेने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक और न्यूनतम वेतन की कानूनी गारंटी की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही।प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भाकपा माले के जिला सचिव नवीन कुमार ने कहा कि चार लेबर कोड मजदूरों को असुरक्षित और मालिकों पर निर्भर बना देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि नई नीतियां श्रमिक हितों की अनदेखी कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं। उनके अनुसार, “यह लड़ाई केवल मजदूरों की नहीं, बल्कि देश की आर्थिक दिशा को बचाने की है।”

दोपहर तक आंदोलन शहर के ज्योति चौक पहुंच गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया। चौक पर यातायात बाधित होते ही लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे और मांग कर रहे थे कि उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाए।सड़क जाम की सूचना मिलते ही नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने पहले समझाने-बुझाने का प्रयास किया और सड़क खाली करने की अपील की। हालांकि प्रदर्शनकारी गिरफ्तारी देने की बात पर अड़े रहे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर थाने भेज दिया। इसके बाद जाम समाप्त हुआ और यातायात सामान्य हो सका।

श्रमिक नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में है। उनका कहना है कि सरकार यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। नेताओं ने रेल चक्का जाम जैसे बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी।हड़ताल का असर केवल औद्योगिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक संदेश भी दे गया। जिले में मजदूर संगठनों की एकजुटता ने यह संकेत दिया कि श्रम कानूनों और निजीकरण के मुद्दे पर असंतोष गहराता जा रहा है।हालांकि प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि किसी को भी शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड, वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिताकृको लेकर देशभर में बहस जारी है। ट्रेड यूनियनें इन्हें मजदूर विरोधी बता रही हैं, जबकि सरकार इन्हें श्रम सुधार की दिशा में बड़ा कदम करार देती है।बक्सर में हुए इस शक्ति प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि श्रमिक संगठनों का विरोध फिलहाल थमने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
