आश्वासन से नहीं माने आंदोलनकारी, शुक्रवार को रेल रोकने का ऐलान

इटाढ़ी रोड स्थित रेलवे गुमटी को दोबारा खोलने की मांग अब आंदोलन का बड़ा रूप लेने लगी है। गुमटी बंद होने से परेशान लोगों ने प्रशासन और रेल विभाग के आश्वासनों पर भरोसा करने से इनकार करते हुए शुक्रवार को रेल चक्का जाम करने का ऐलान किया है।

आश्वासन से नहीं माने आंदोलनकारी, शुक्रवार को रेल रोकने का ऐलान

__ इटाढ़ी रोड रेलवे गुमटी खोलने की मांग पर आंदोलन तेज, कांग्रेस-राजद ने दिया समर्थन; बोले—गुमटी नहीं खुली तो ट्रैक पर उतरेंगे

केटी न्यूज/बक्सर।

इटाढ़ी रोड स्थित रेलवे गुमटी को दोबारा खोलने की मांग अब आंदोलन का बड़ा रूप लेने लगी है। गुमटी बंद होने से परेशान लोगों ने प्रशासन और रेल विभाग के आश्वासनों पर भरोसा करने से इनकार करते हुए शुक्रवार को रेल चक्का जाम करने का ऐलान किया है। रविवार को आंदोलन के चौथे दिन कांग्रेस और राजद के नेताओं ने भी धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों का समर्थन किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय और राजद सांसद सुधाकर सिंह ने आंदोलन में शामिल होकर मांग को जायज बताया।दलित-अतिपिछड़ा स्वाभिमान संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में सरोज राजभर के नेतृत्व में चल रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन में वक्ताओं ने कहा कि आरओबी पुल के ध्वस्त होने के बावजूद रेलवे गुमटी को बंद रखा गया है।

गुमटी बंद रहने से आसपास के हजारों लोगों को रोजाना लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ रहा है। इससे मरीजों, स्कूली बच्चों, किसानों, मजदूरों और आम राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।आंदोलनकारियों ने कहा कि पूर्व में अनशन के दौरान प्रशासन की ओर से कार्रवाई का भरोसा देकर अनशन समाप्त कराया गया था, लेकिन बाद में कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ गया और दोबारा अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करना पड़ा।धरनार्थियों ने कहा कि श्रावणी मेले के दौरान गंगा स्नान के लिए बक्सर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।

ऐसे में गुमटी बंद रहने से कांवरियों और श्रद्धालुओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अब केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। शुक्रवार को मांग पूरी नहीं होने पर वे रेलवे ट्रैक पर उतरकर रेल परिचालन बाधित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष का आंदोलन नहीं, बल्कि आम जनता की परेशानी से जुड़ा संघर्ष है।धरने में रामएकबाल ठाकुर, राष्ट्रपति राजभर, दीनानाथ ठाकुर, बीरबल रजक, विनोद ठाकुर, रमाकांत चंद्रवंशी, अजीत कुशवाहा और विनोद कुशवाहा समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।