घटिया निर्माण पर ग्रामीणों का हंगामा, तालाब घाट का काम रुकवाया
प्रखंड के दुल्फा गांव में तालाब सौंदर्यीकरण एवं घाट निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश उस समय फूट पड़ा, जब स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर कथित रूप से घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कार्य को तत्काल रुकवा दिया।

__ दुल्फा में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर उठे सवाल, योजना बोर्ड नहीं मिलने से बढ़ा विवाद; ग्रामीणों ने डीएम से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की
केटी न्यूज/राजपुर।
प्रखंड के दुल्फा गांव में तालाब सौंदर्यीकरण एवं घाट निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश उस समय फूट पड़ा, जब स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर कथित रूप से घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कार्य को तत्काल रुकवा दिया। ग्रामीणों ने निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।गांव स्थित मध्य विद्यालय के समीप कामख्या मंदिर के पास पोखरे पर घाट निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसी दौरान युवा समाजसेवी चंदन कुशवाहा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में प्रयुक्त ईंटें बेहद कमजोर हैं और मामूली दबाव पड़ते ही टूट जा रही हैं। वहीं सीमेंट और बालू की गुणवत्ता पर भी लोगों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मानकों की अनदेखी कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित कोई सूचना पट्ट या प्राक्कलित लागत का बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि कार्य किस योजना के तहत और कितनी राशि से कराया जा रहा है। इससे लोगों के बीच संदेह और गहरा गया है।मामले की जानकारी लेने पर मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि संबंधित निर्माण कार्य मनरेगा योजना के अंतर्गत नहीं कराया जा रहा है।

इस बयान के बाद ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी।ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए, उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो तथा यदि अनियमितता की पुष्टि होती है तो दोषी लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जांच कर गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे व्यापक जन आंदोलन और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। गांव में इस मुद्दे को लेकर दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा।

