विकास योजनाओं पर ‘ब्रेक’ से फूटा जनाक्रोश, जिला पार्षद ने किया आत्मदाह का प्रयास
जिला परिषद क्षेत्रों में विकास योजनाओं के लंबे समय से अटके रहने का मुद्दा शनिवार को उस समय विस्फोटक रूप ले गया, जब नवानगर दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के जिला पार्षद सदस्य डॉ. राजीव कुमार ने समाहरणालय परिसर में जोरदार विरोध दर्ज कराया। उनके विरोध के दौरान हुई कार्रवाई ने जिले की विकास व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।


__ मचा रहा हड़कंप, पुलिस ने नियंत्रित की स्थिति
केटी न्यूज/बक्सर
जिला परिषद क्षेत्रों में विकास योजनाओं के लंबे समय से अटके रहने का मुद्दा शनिवार को उस समय विस्फोटक रूप ले गया, जब नवानगर दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के जिला पार्षद सदस्य डॉ. राजीव कुमार ने समाहरणालय परिसर में जोरदार विरोध दर्ज कराया। उनके विरोध के दौरान हुई कार्रवाई ने जिले की विकास व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।जानकारी के अनुसार, डॉ. राजीव कुमार विकास कार्यों में लगातार हो रही देरी, योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने समाहरणालय पहुंचे थे। इस दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई।

मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें अपने नियंत्रण में ले लिया और नगर थाना ले गई।डॉ. राजीव कुमार को हिरासत में लिए जाने की खबर फैलते ही जिला परिषद सदस्यों और उनके प्रतिनिधियों में भारी नाराजगी देखने को मिली। समाहरणालय परिसर में देखते ही देखते जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा लग गया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। विरोध प्रदर्शन में जिला पार्षद सदस्य पूजा देवी, बेबी देवी, नीलम देवी, धर्मेंद्र ठाकुर, ममता कुमारी समेत कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिला परिषद के माध्यम से संचालित होने वाली कई विकास योजनाएं लंबे समय से अधर में लटकी हुई हैं। सड़क, नाली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य प्रभावित होने के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उनका आरोप था कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।जनप्रतिनिधियों ने इसे केवल एक व्यक्ति का विरोध नहीं, बल्कि पूरे जिला परिषद तंत्र की पीड़ा बताया। उनका कहना था कि यदि विकास योजनाओं को शीघ्र गति नहीं दी गई और जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं सुना गया, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।कुछ समय तक समाहरणालय परिसर में माहौल गरमाया रहा, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रण में रही। हालांकि शनिवार की यह घटना यह सवाल जरूर छोड़ गई कि आखिर विकास कार्यों की रफ्तार थमने से उपजा असंतोष अब किस दिशा में जाएगा।

