शिक्षा विभाग में माफियागिरी व सरकारी धन के बंदरबाट की जांच पर उठ रहे सवाल...

बक्सर शिक्षा विभाग में फैले कथित भ्रष्टाचार और तथा कथित शिक्षा माफियाओं अजय सिंह व अरविंद सिंह की दबंगई को लेकर जिलाधिकारी डॉ. विद्यानंद सिंह ने पिछले दिनों बेहद सख्त रुख अपनाते हुए जांच अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि मामले की जांच में तेजी लाई जाए और रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत की जाए। डीएम ने यहां तक कहा था कि रिपोर्ट मिलते ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग में माफियागिरी व सरकारी धन के बंदरबाट की जांच पर उठ रहे सवाल...

-- डीएम के सख्त निर्देश के बावजूद एक हफ्ते बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आई सामने, शिक्षा माफियाओं पर कार्रवाई ठप, लो पूछ रहे आखिर कब तक चलेगी बक्सर के शिक्षा विभाग में माफियागिरी का खेल

केटी न्यूज/बक्सर

बक्सर शिक्षा विभाग में फैले कथित भ्रष्टाचार और तथा कथित शिक्षा माफियाओं अजय सिंह व अरविंद सिंह की दबंगई को लेकर जिलाधिकारी डॉ. विद्यानंद सिंह ने पिछले दिनों बेहद सख्त रुख अपनाते हुए जांच अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि मामले की जांच में तेजी लाई जाए और रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत की जाए। डीएम ने यहां तक कहा था कि रिपोर्ट मिलते ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन, डीएम के तेवर दिखाने के पूरे एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। कार्रवाई के नाम पर अब तक सन्नाटा ही है। इस स्थिति ने न केवल विभागीय अधिकारियों व शिक्षकों के बीच निराशा पैदा की है बल्कि यह सवाल भी उठने लगे हैं कि आखिर कब तक शिक्षा विभाग में माफियागिरी और सरकारी धन की लूट चलती रहेगी।

-- सवालों के घेरे में जांच की गति

जिले के शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी और शिक्षक लगातार दबे स्वर में कह रहे हैं कि जांच की प्रक्रिया धीमी पड़ने से माफियाओं का हौसला और बुलंद हो रहा है। जिन आरोपों की सूची बेहद लंबी है, जैसे हाउसकीपिंग एजेंसी के नाम पर सरकारी राशि की उगाही, एमडीएम थाली आपूर्ति में गड़बड़ी, बेंच-डेस्क घोटाला, सरकारी विद्यालयों में बोरिंग के नाम पर लूट, शिक्षकों व अधिकारियों से मारपीट और भयादोहन, इनमें से किसी पर भी ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है।

डीएम ने खुद स्वीकारा था कि शिक्षा विभाग में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाएगा और पारदर्शी माहौल बनाया जाएगा। बावजूद इसके जांच रिपोर्ट का सार्वजनिक न होना इस संकल्प पर सवाल खड़े कर रहा है।

-- ताज्जूब, सबूत मौजूद, लेकिन कार्रवाई नहीं

केशव टाइम्स ने पहले ही यह खुलासा किया था कि हाउसकीपिंग एजेंसी फर्स्ट आइडिया और कथित शिक्षा माफियाओं के गठजोड़ के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। एजेंसी ‘फर्स्ट आइडिया’ से अजय सिंह व अरविंद सिंह के परिजनों के खातों में लाखों रुपये का लेन-देन हुआ है। यहां तक कि कलेक्ट्रेट स्थित केनरा बैंक से संबंधित कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी भी सामने आई थी। जिसमें फर्स्ट आइडिया द्वारा अरविंद सिंह, उनकी पत्नी, बेटी समेत चार खातों पर लाखों रूपए का ट्रांजेक्शन किया गया है।

इतने ठोस सबूतों के बावजूद जांच रिपोर्ट लंबित रहना और कार्रवाई न होना लोगों को खटक रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब लेन-देन का दस्तावेज और तत्कालीन स्थापना डीपीओ से मारपीट का वीडियो सबूत तक मौजूद है, तो फिर देरी क्यों।

-- वायरल वीडियो से उजागर दबंगई

16 मार्च 2023 को नेहरू स्मारक स्कूल परिसर में तत्कालीन स्थापना डीपीओ मो. शारिक अशरफ से मारपीट व धमकाने का वायरल वीडियो इन तथाकथित शिक्षा माफियाओं की दबंगई का जीता-जागता सबूत है। वीडियो में साफ देखा गया कि किस तरह सरकारी कार्य में बाधा डालने की कोशिश की गई। उस वक्त तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी अनिल कुमार द्विवेदी भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन माफियाओं के सामने असहाय दिखे।

इस घटना ने विभाग में उनकी दहशत और पकड़ दोनों को उजागर किया। अब जबकि जांच को एक सप्ताह से अधिक का समय हो गया है, उस वायरल वीडियो पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

-- विभागीय अधिकारियों और शिक्षकों में निराशा

शिक्षा विभाग के कई अधिकारी और शिक्षक नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि माफियाओं की दहशत इतनी है कि वे खुलकर बोल नहीं पा रहे। कई ने दबे स्वर में माना कि इनके कारण कार्यालय में सामान्य ढंग से काम करना मुश्किल हो गया है। वहीं, डीएम की सक्रियता के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब स्थिति बदलेगी। लेकिन रिपोर्ट न आने और कार्रवाई न होने से निराशा गहराती जा रही है।

-- जनता कर रही है इंतजार

जिले की जनता अब बेसब्री से इंतजार कर रही है कि आखिर कब तक इन शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई होगी। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जांच अधिकारी किसी दबाव में हैं, या फिर यह सिर्फ समय काटने की कवायद है? लोग यह जानना चाहते हैं कि कब तक सरकारी योजनाओं और विभागीय संसाधनों की लूट-खसोट शिक्षा माफियाओं के इशारे पर चलती रहेगी।

-- आगे क्या...

जिलाधिकारी ने सख्ती दिखाते हुए साफ कहा था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भयमुक्त माहौल में काम करना उनकी प्राथमिकता है, लेकिन अब देखना होगा कि जांच टीम कब तक रिपोर्ट डीएम को सौंपती है और उसके बाद कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।

फिलहाल विभागीय हलकों में यही चर्चा है कि जब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक शिक्षा माफियाओं पर शिकंजा कसने की बात केवल कागजों और बयानों तक ही सीमित रहेगी।एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी जांच पूरी न होना और कार्रवाई का टलना शिक्षा विभाग की गंभीर समस्या को और गहराता दिख रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि कब तक चलेगी शिक्षा विभाग में माफियागिरी व सरकारी धन के लूट का खेल।