जच्चा-बच्चा सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, प्रसव के कुछ घंटों बाद महिला की मौत

नावानगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आने से एक बार फिर मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसवोत्तर देखभाल को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला ने अस्पताल में एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया था, लेकिन प्रसव के कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।

जच्चा-बच्चा सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, प्रसव के कुछ घंटों बाद महिला की मौत

__ स्वस्थ बच्ची को जन्म देने के बाद बिगड़ी तबीयत, रक्तस्राव से हालत गंभीर होने पर किया गया रेफर; इलाज के दौरान तोड़ा दम

केटी न्यूज/डुमरांव

नावानगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आने से एक बार फिर मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसवोत्तर देखभाल को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला ने अस्पताल में एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया था, लेकिन प्रसव के कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। बेहतर इलाज के लिए उसे रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में मातम पसरा हुआ है, जबकि नवजात बच्ची जन्म लेते ही मां के स्नेह से वंचित हो गई।मृतका की पहचान सिकरौल थाना क्षेत्र के बाबूगंज इंग्लिश गांव निवासी 22 वर्षीय रूबी कुमारी के रूप में हुई है।

परिजनों के अनुसार प्रसव पीड़ा शुरू होने पर रूबी को नावानगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था।वहां चिकित्सकों की देखरेख में उनका प्रसव कराया गया और उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। शुरुआत में जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति सामान्य बताई जा रही थी।इसी दौरान प्रसव के कुछ समय बाद रूबी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। चिकित्सकीय सूत्रों के अनुसार उन्हें प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट पार्टम हैमरेज) की शिकायत हो गई, जो मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। रक्तस्राव बढ़ने के साथ उनकी हालत गंभीर होने लगी।

स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध संसाधनों से स्थिति नियंत्रित नहीं होने पर चिकित्सकों ने तत्काल उन्हें अनुमंडल अस्पताल डुमरांव रेफर कर दिया।परिजन गंभीर अवस्था में रूबी को लेकर अनुमंडल अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया।अस्पताल प्रशासन के अनुसार महिला को बचाने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय प्रयास किए गए, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर स्थिति के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया।घटना की सूचना मिलते ही मृतका के परिजन और ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए। महिला की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक का माहौल बना हुआ है।

सबसे मार्मिक स्थिति नवजात बच्ची की है, जिसने जन्म लेते ही अपनी मां को खो दिया।अनुमंडल अस्पताल की प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी ने बताया कि महिला को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों की टीम ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी। हर संभव प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।यह घटना प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार निगरानी और समय पर विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।