बाढ़ राहत के डीजल पर उठे सवाल, 20 लीटर आवंटन में नाविकों तक पहुंच रहा महज 5 लीटर!

बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ब्रह्मपुर प्रखंड में राहत और बचाव कार्यों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे डीजल के वितरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ढाबी और उत्तरी नैनीजोर समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों के निरीक्षण के दौरान पूर्व विधायक डॉ. अजित कुमार सिंह को ग्रामीणों और नाविकों ने कथित तौर पर डीजल कटौती की शिकायत की।

बाढ़ राहत के डीजल पर उठे सवाल, 20 लीटर आवंटन में नाविकों तक पहुंच रहा महज 5 लीटर!

__ पूर्व विधायक ने राजस्व कर्मियों को लगाई फटकार, सीओ से फोन पर जवाब-तलब; डीएम से लिखित शिकायत कर जांच कराने की चेतावनी

केटी न्यूज/डुमरांव

बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ब्रह्मपुर प्रखंड में राहत और बचाव कार्यों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे डीजल के वितरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ढाबी और उत्तरी नैनीजोर समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों के निरीक्षण के दौरान पूर्व विधायक डॉ. अजित कुमार सिंह को ग्रामीणों और नाविकों ने कथित तौर पर डीजल कटौती की शिकायत की। आरोप है कि नाव संचालन के लिए प्रतिदिन 20 लीटर डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन नाविकों को महज पांच लीटर ही दिया जा रहा है। यानी प्रतिदिन 15 लीटर डीजल की कथित कटौती का मामला सामने आया है।शिकायत सुनते ही पूर्व विधायक ने मौके पर मौजूद राजस्व कर्मियों से जवाब-तलब किया और कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने फोन पर अंचलाधिकारी से भी पूरे मामले की जानकारी ली।

पूर्व विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आपदा की घड़ी में राहत सामग्री और संसाधनों के वितरण में किसी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण पहले ही आवागमन और जरूरी सुविधाओं के संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में नाव संचालन के लिए मिलने वाले डीजल में कथित कटौती गंभीर मामला है। उन्होंने राजस्व कर्मियों को चेताते हुए कहा कि “आपदा को अवसर मत बनाइए। गरीब और मजबूर ग्रामीणों के हिस्से में कटौती किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी।”दरअसल, ढाबी गांव और उत्तरी नैनीजोर क्षेत्र के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी फैलने से ग्रामीणों का सड़क संपर्क प्रभावित है।

कई बस्तियों के लिए नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन बनी हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में दो-तीन डेंगी नाव और एक बड़ी नाव के सहारे आवागमन हो रहा है। नावों की कमी और ईंधन को लेकर सामने आई शिकायत ने राहत व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।पूर्व विधायक ने कहा कि वे पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी और वरीय अधिकारियों से लिखित रूप में करेंगे तथा डीजल वितरण की जांच की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि 20 लीटर डीजल आवंटित हो रहा है तो नाविकों तक केवल पांच लीटर पहुंचने की स्थिति में शेष डीजल कहां जा रहा है, इसकी जांच जरूरी है।

__जांच के बाद कार्रवाई का सीओ ने दिया भरोसा

इधर, अंचलाधिकारी ने पूर्व विधायक को फोन पर बताया कि प्रशासन की ओर से प्रतिदिन 20 लीटर डीजल राजस्व कर्मियों के माध्यम से नाविकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि वितरण के बीच कहीं अनियमितता हो रही है तो उसकी जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का भी भरोसा दिया गया। सीओ ने कहा कि वे स्वयं भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि नावों की संख्या बढ़ाने के साथ डीजल वितरण में पूरी पारदर्शिता जरूरी है। खासकर मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को बाढ़ग्रस्त इलाकों से बाहर निकालने में नावों की उपलब्धता अहम बनी हुई है। ऐसे में डीजल वितरण को लेकर उठे आरोपों की निष्पक्ष जांच अब जरूरी मानी जा रही है।