विश्व पर्यावरण दिवस पर न्यायालय परिसर में हरियाली का संकल्प

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को व्यवहार न्यायालय, बक्सर स्थित "न्याय वाटिका" हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प का साक्षी बना। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), बक्सर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और विधिक स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

विश्व पर्यावरण दिवस पर न्यायालय परिसर में हरियाली का संकल्प

__ 100 वर्ष पुराने पांच ऐतिहासिक वृक्षों को गोद लेकर संरक्षण अभियान की शुरुआत, न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं ने किया पौधरोपण

केटी न्यूज/बक्सर

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को व्यवहार न्यायालय, बक्सर स्थित "न्याय वाटिका" हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प का साक्षी बना। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), बक्सर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और विधिक स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान न केवल नए पौधे लगाए गए, बल्कि जिले के 100 वर्ष से अधिक पुराने पांच ऐतिहासिक वृक्षों के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण संकल्प लिया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम उदय प्रताप सिंह सहित न्यायिक अधिकारियों ने पौधरोपण कर किया।

इस अवसर पर कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार प्रथम, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार शुक्ला, मानस कुमार वत्सल, सुनील कुमार द्वितीय, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी देवेश कुमार, अवर न्यायाधीश भोला सिंह और महेश्वर नाथ पांडे भी मौजूद रहे। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बबन ओझा, सचिव बिंदेश्वरी प्रसाद पांडे तथा न्याय मंडल के अन्य न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने भी पौधरोपण में सक्रिय भागीदारी निभाई।पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने जिले के पांच ऐतिहासिक वृक्षों को गोद लेकर उनके संरक्षण का अभियान शुरू किया। इनमें इटाढ़ी प्रखंड के सोंधिला गांव स्थित तीन प्राचीन वटवृक्ष तथा हकीमपुर पंचायत के मंगोलपुर गांव में स्थित दो विशाल पीपल वृक्ष शामिल हैं।

इन वृक्षों की आयु 100 वर्ष से अधिक बताई जाती है। डीएलएसए सचिव नेहा दयाल, पीएलवी शत्रुघ्न सिन्हा और विवेक कुमार ने संबंधित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों को इन वृक्षों के पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी तथा उनके संरक्षण के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएलएसए सचिव एवं अवर न्यायाधीश नेहा दयाल ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ प्रकृति ही मानव जीवन का वास्तविक आधार है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का दुष्प्रभाव अब सीधे मानव जीवन पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों और सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी।

विश्व पर्यावरण दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन के दौरान 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद वर्ष 1973 में "केवल एक पृथ्वी" थीम के साथ पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और ऊर्जा संरक्षण जैसे छोटे-छोटे प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य का आधार बन सकते हैं।

कार्यक्रम में विधिक सहायता प्रतिरक्षा परामर्श प्रणाली के चीफ विनय कुमार सिन्हा, डिप्टी चीफ कुमार मानवेंद्र, संजय कुमार चौबे तथा सहायक काजल कुमारी, अभिनव वशिष्ठ, आकाश कुमार श्रीवास्तव और विकास यादव भी उपस्थित रहे। वहीं पैनल अधिवक्ता दीपिका कुमारी केशरी, अखिलेश्वर दुबे, रामानंद मिश्रा, जितेंद्र कुमार सिन्हा, कंचन कुमारी, चंद्र विजय सिंह, चंद्रकला वर्मा समेत बड़ी संख्या में विधिक स्वयंसेवकों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। पूरे कार्यक्रम में हरित भविष्य और प्रकृति संरक्षण का संदेश प्रमुख रूप से गूंजता रहा।