गलत सेवा तिथि से वेतन-लाभ का खेल! प्रधान लिपिक से जवाब-तलब

जिला शिक्षा कार्यालय में सेवा रिकॉर्ड और वेतन भुगतान से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। डीईओ कार्यालय के प्रधान लिपिक अनिल कुमार राय पर योगदान की अलग-अलग तिथियों के आधार पर वेतन, एमएसीपी और पदोन्नति का लाभ लेने का मामला सामने आया है।

गलत सेवा तिथि से वेतन-लाभ का खेल! प्रधान लिपिक से जवाब-तलब

__ सेवा पुस्तिका और विभागीय रिकॉर्ड में सामने आया विरोधाभास, वेतन, दो एमएसीपी व प्रमोशन के लाभ पर उठे सवाल; वसूली की तलवार लटकी

केटी न्यूज/बक्सर।

जिला शिक्षा कार्यालय में सेवा रिकॉर्ड और वेतन भुगतान से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। डीईओ कार्यालय के प्रधान लिपिक अनिल कुमार राय पर योगदान की अलग-अलग तिथियों के आधार पर वेतन, एमएसीपी और पदोन्नति का लाभ लेने का मामला सामने आया है। प्रकरण को लेकर शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय उपनिदेशक अमित कुमार ने प्रधान लिपिक से जवाब-तलब करते हुए निर्धारित अवधि में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।क्षेत्रीय उपनिदेशक की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रधान लिपिक के संबंध में बकाया वेतन भुगतान, एमएसीपी और प्रमोशन आदि के मामले में विभाग से मार्गदर्शन मांगा था।

इसके बाद कार्यालय में उपलब्ध संचिका और प्रधान लिपिक की सेवा पुस्तिका का अवलोकन किया गया। जांच के दौरान दोनों अभिलेखों में दर्ज सेवा अवधि को लेकर महत्वपूर्ण अंतर सामने आया।विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, मानव संसाधन विकास विभाग के उप सचिव द्वारा वर्ष 2010 में प्रधान लिपिक के योगदान की तिथि को स्वीकृति दी गई थी। इसी आधार पर वर्ष 2004 से कर्तव्य की तिथि मानते हुए वेतन भुगतान का आदेश जारी किया गया था। दूसरी ओर, सेवा पुस्तिका में क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक के एक पत्र का हवाला देते हुए प्रधान लिपिक की प्रतिनियुक्ति मोहनियां, भभुआ में दर्शायी गई है। इसी आधार पर वर्ष 1991 से वेतन भुगतान किए जाने के साथ दो एमएसीपी और प्रधान लिपिक पद का लाभ दिए जाने की बात सामने आई है।

रिकॉर्ड में सामने आए इस विरोधाभास ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय पत्र में स्पष्ट संकेत दिया गया है कि यदि गलत सेवा अवधि के आधार पर वित्तीय लाभ लिया गया है तो अनियमित रूप से प्राप्त वेतन एवं अन्य लाभ की राशि की वसूली का मामला बन सकता है।अब प्रधान लिपिक के जवाब के बाद विभाग आगे की कार्रवाई तय करेगा। साथ ही, इस प्रकरण की जांच आगे बढ़ने पर सेवा रिकॉर्ड में दर्ज अन्य प्रविष्टियों और वित्तीय लाभों की भी पड़ताल होने की संभावना है। मामले के सामने आने के बाद जिला शिक्षा कार्यालय में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।