डुमरांव में सफाई व्यवस्था ठप: दूसरे दिन भी हड़ताल पर डटे सफाईकर्मी
बिहार स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (ऐक्टू संबद्ध) एवं बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले चल रहा राज्यव्यापी सफाईकर्मियों का हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। डुमरांव नगर परिषद क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।


--दो दिनों से कूड़े का अंबार, सड़कों और मोहल्लों में उठने लगी दुर्गंध; नगर परिषद की कार्यशैली पर उठे सवाल
केटी न्यूज/डुमरांव
बिहार स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (ऐक्टू संबद्ध) एवं बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले चल रहा राज्यव्यापी सफाईकर्मियों का हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। डुमरांव नगर परिषद क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लगातार दो दिनों से कूड़ा उठाव बंद रहने के कारण शहर के विभिन्न वार्डों, मुख्य सड़कों और गलियों में कूड़े का अंबार लग गया है। कई स्थानों पर सड़कों के किनारे जमा कचरे से तेज बदबू उठने लगी है, जिससे स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।सुबह छह बजे ही नगर परिषद के सभी सफाईकर्मी पुराना नगर परिषद कार्यालय परिसर में एकत्रित हो गए। आंदोलन की शुरुआत 27 सदस्यीय संचालन समिति के गठन के साथ हुई। इसके बाद सफाईकर्मियों ने पुराना नगर परिषद कार्यालय से मार्च निकाला, जो गोला रोड, चौक रोड होते हुए छठिया पोखरा पहुंचा।

वहां सभा आयोजित की गई। इसके बाद जुलूस गौशाला रोड, शहीद मर्द रोड होते हुए शक्ति द्वार पहुंचा, जहां दूसरी सभा हुई। फिर जंगल बाजार, चौक रोड और गोला रोड से होते हुए मार्च पुनः पुराना नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर समाप्त हुआ।सभा को संबोधित करते हुए बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के सचिव शिव शंकर तिवारी, भाकपा माले नगर कमेटी नेता सर्वेश कुमार पांडेय तथा बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन के नेता ओम प्रकाश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार मजदूर विरोधी नीतियों पर काम कर रही है और धीरे-धीरे सरकारी विभागों को एनजीओ तथा निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है।नेताओं ने विशेष रूप से डुमरांव नगर परिषद की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि सफाई के नाम पर हर महीने लगभग 96 लाख रुपये की निकासी की जा रही है, लेकिन उसका स्पष्ट हिसाब सार्वजनिक नहीं किया जा रहा।

उनका आरोप था कि इस राशि का केवल लगभग 25 प्रतिशत ही वास्तविक सफाई कार्यों पर खर्च होता है, जबकि शेष राशि में बड़े पैमाने पर बंदरबांट हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार के नगर निकायों को एनजीओ के हवाले करने की तैयारी चल रही है, जिसका कर्मचारी विरोध करेंगे।हड़ताल में भगवान पासवान, जाबिर कुरैशी, राधेश्याम शर्मा, सीपीआई नेता कृष्णा जी, पूजा यादव सहित सफाईकर्मी किस्मत कुमार, चंदन राम, रूपक बास्फोर, करन बास्फोर, शीला देवी, रमिया देवी और शोभा देवी समेत सैकड़ों कर्मचारी शामिल रहे।इधर, सफाईकर्मियों की हड़ताल का असर आम नागरिकों पर साफ दिखने लगा है। नगर परिषद क्षेत्र के कई वार्डों में कूड़े के ढेर सड़क तक फैल गए हैं। नालियों के आसपास जमा कचरे से मच्छरों और दुर्गंध की समस्या बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब निगाहें नगर परिषद प्रशासन और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे सफाई व्यवस्था बहाल करने तथा कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।

