इटाढ़ी गुमटी विवाद पर उबाल, ट्रैक की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी; आरपीएफ ने रोका, रेल परिचालन रहा सामान्य
इटाढ़ी रोड रेलवे गुमटी को पुनः चालू करने की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन शनिवार को पांचवें दिन नए मोड़ पर पहुंच गया। गुमटी बंद होने से नाराज प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक की ओर कूच कर रेल चक्का जाम करने का प्रयास किया, लेकिन पहले से तैनात रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने उन्हें ट्रैक तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया।


__ पांचवें दिन आंदोलन ने पकड़ा उग्र रूप, 11 दिन बाद बड़े रेल चक्का जाम की चेतावनी; गुमटी बंद रहने से आमजन की परेशानी का उठाया मुद्दा
केटी न्यूज/बक्सर :
इटाढ़ी रोड रेलवे गुमटी को पुनः चालू करने की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन शनिवार को पांचवें दिन नए मोड़ पर पहुंच गया। गुमटी बंद होने से नाराज प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक की ओर कूच कर रेल चक्का जाम करने का प्रयास किया, लेकिन पहले से तैनात रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने उन्हें ट्रैक तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बल के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई। हालांकि बाद में अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को समझाकर वापस धरना स्थल भेज दिया, जिससे रेल परिचालन पूरी तरह सामान्य बना रहा।धरना स्थल से बैनर और तिरंगा लेकर निकले प्रदर्शनकारियों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का कहना था कि रेलवे गुमटी बंद किए जाने से हजारों लोगों का दैनिक आवागमन प्रभावित हो गया है।

मरीजों को अस्पताल पहुंचने, स्कूली बच्चों को विद्यालय जाने, किसानों को खेतों तक पहुंचने और आम लोगों को शहर आने-जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। उनका आरोप था कि बिना समुचित वैकल्पिक व्यवस्था किए रेलवे प्रशासन ने गुमटी बंद कर दी, जिससे आमजन की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि श्रावणी मेले के दौरान गंगा स्नान और जलाभिषेक के लिए आने-जाने वाले लाखों कांवरियों को भी इस निर्णय का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उनका कहना था कि रेलवे ओवरब्रिज में तकनीकी खराबी के कारण वाहनों का आवागमन भी प्रभावित है, ऐसे में गुमटी बंद रखना लोगों के लिए दोहरी परेशानी का कारण बन गया है।धरने की अध्यक्षता जिला संयोजक सरोज राजभर ने की, जबकि संचालन राम इकबाल ठाकुर ने किया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों से जुड़ा आंदोलन है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही रेलवे गुमटी नहीं खोली गई तो 11 दिन बाद बड़ी संख्या में लोग पूरे दिन रेल चक्का जाम कर व्यापक आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी।वहीं आरपीएफ प्रभारी ने बताया कि आंदोलन की पूर्व सूचना मिलने के कारण सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शनकारियों को रेलवे ट्रैक तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया गया और उन्हें समझाकर वापस भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि रेल परिचालन बाधित नहीं होने दिया गया तथा आंदोलनकारियों की मांग से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। आंदोलन में राष्ट्रपति राजभर, दीनानाथ ठाकुर, बीरबल रजक, विनोद ठाकुर, रमाकांत चंद्रवंशी, अजीत कुशवाहा, विनोद कुशवाहा, लाल बाबू माली, कृष्णावती देवी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

