गांव में लगे सीसीटीवी पर बवाल: महिला ने लगाया निजता भंग करने का आरोप, पुलिस जांच में जुटी

डुमरांव थाना क्षेत्र के सम्हार गांव से निजता और तकनीक के दुरुपयोग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव की एक महिला ने पुलिस को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि एक ग्रामीण ने अपने घर के बाहर और एक पेड़ पर सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं, जिनका इस्तेमाल महिलाओं और लड़कियों की निजता भंग करने के लिए किया जा रहा है।

गांव में लगे सीसीटीवी पर बवाल: महिला ने लगाया निजता भंग करने का आरोप, पुलिस जांच में जुटी

__ शौच के लिए बाहर जाने वाली महिलाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग का आरोप, कैमरे का एक्सेस खंगालेगी पुलिस; घटना ने सीसीटीवी अभियान की हकीकत पर भी उठाए सवाल

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव थाना क्षेत्र के सम्हार गांव से निजता और तकनीक के दुरुपयोग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव की एक महिला ने पुलिस को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि एक ग्रामीण ने अपने घर के बाहर और एक पेड़ पर सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं, जिनका इस्तेमाल महिलाओं और लड़कियों की निजता भंग करने के लिए किया जा रहा है।महिला ने अपने आवेदन में कहा है कि गांव में कई घरों में अब भी शौचालय नहीं हैं। ऐसे में उसे समेत कई महिलाएं और लड़कियां खुले में शौच के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए संबंधित व्यक्ति कैमरों के जरिए महिलाओं की गतिविधियों पर नजर रखता है तथा मोबाइल में वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड करता है।

महिला का यह भी आरोप है कि वह समय-समय पर कैमरे की दिशा और लोकेशन बदलता रहता है, जिससे अधिक क्षेत्र उसकी निगरानी में आ जाता है।आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति कैमरों के माध्यम से गांव की महिलाओं और लड़कियों की गतिविधियों पर नजर रखता है और यह देखता है कि कौन किससे बात कर रहा है तथा कौन किसके घर आ-जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है।मामले की गंभीरता को देखते हुए डुमरांव थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने जांच की जिम्मेदारी एक महिला पुलिस पदाधिकारी को सौंपी है। थानाध्यक्ष ने बताया कि कैमरों के एक्सेस, रिकॉर्डिंग और उनकी दिशा की जांच कराई जाएगी।

यदि जांच में महिला के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। महिला ने पुलिस से अपनी पहचान गोपनीय रखने का भी अनुरोध किया है।यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अपराध नियंत्रण और साक्ष्य संकलन में सीसीटीवी कैमरों की भूमिका लगातार बढ़ी है। पुलिस और न्यायालयों के लिए सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य माने जाते हैं, लेकिन यदि इनका उपयोग किसी की निजता का उल्लंघन करने या महिलाओं की गरिमा से खिलवाड़ करने के लिए किया जाए तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

__ ओडीएफ अभियान पर भी उठे सवाल

घटना ने गांवों में स्वच्छ भारत मिशन और ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) अभियान की वास्तविक स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि गांव की महिलाएं आज भी शौचालय के अभाव में खुले में जाने को विवश हैं, तो यह न केवल सरकारी दावों पर प्रश्नचिह्न लगाता है बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और निजता से जुड़े मुद्दों को भी उजागर करता है। अब सबकी नजर पुलिस जांच पर है कि आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है और प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।