48 घंटे बाद मिला बिहार घाट के पास गंगा में डूबे किशोर का शव, बुझ गया इकलौता चिराग
नैनीजोर बिहार घाट पर गंगा नदी एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने आया 17 वर्षीय किशोर सूरज कुमार सिंह गंगा स्नान के दौरान ऐसी गहराई में समा गया कि 48 घंटे बाद उसका शव बरामद हो सका। इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार का इकलौता चिराग बुझा दिया, बल्कि गंगा घाटों की बदहाल सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


__ नैनीजोर बिहार घाट हादसे ने खोली सुरक्षा इंतजामों की पोल, ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर
नैनीजोर बिहार घाट पर गंगा नदी एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने आया 17 वर्षीय किशोर सूरज कुमार सिंह गंगा स्नान के दौरान ऐसी गहराई में समा गया कि 48 घंटे बाद उसका शव बरामद हो सका। इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार का इकलौता चिराग बुझा दिया, बल्कि गंगा घाटों की बदहाल सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।रविवार दोपहर जैसे ही एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की संयुक्त टीम ने ढाबी घाट के समीप से सूरज का शव बरामद किया, घाट पर मौजूद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। मां-बाप बेटे के शव से लिपटकर बिलख पड़े। घाट का माहौल इतना दर्दनाक था कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के सुहियां गांव निवासी सूरज कुमार सिंह अपने परिवार के साथ दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने नैनीजोर बिहार घाट पहुंचा था। अंतिम संस्कार के बाद परिवार के लोग गंगा स्नान और तिलांजलि देने नदी में उतरे। इसी दौरान अचानक चार लोग तेज धारा और गहरे पानी की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों ने तीन लोगों को किसी तरह बाहर निकाल लिया, लेकिन सूरज लापता हो गया।घटना के बाद घाट पर अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण घंटों तक नदी में उतरकर किशोर की तलाश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। सूचना मिलने के बाद नैनीजोर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। बाद में एनडीआरएफ को भी लगाया गया।

लगातार दो दिनों तक नाव, गोताखोर और आधुनिक उपकरणों की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया।रविवार को करीब 12 बजे ढाबी घाट किनारे शव मिलने के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया। सूरज अपने पिता दिलीप कुमार सिंह का इकलौता बेटा था। परिवार में सिर्फ एक बहन है। बेटे की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। गांव में भी शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा प्रशासन पर फूट पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि नैनीजोर बिहार घाट, बलूआ घाट और पत्थर घाट लंबे समय से बेहद खतरनाक बने हुए हैं। कई जगहों पर नदी की गहराई 80 से 100 फीट तक पहुंच चुकी है और किनारे से कुछ कदम आगे बढ़ते ही अचानक गहरा पानी शुरू हो जाता है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही स्थायी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

ग्रामीणों ने मांग की है कि खतरनाक घाटों की तत्काल पहचान कर बैरिकेडिंग कराई जाए, चेतावनी संकेत लगाए जाएं और स्थायी बचाव दल की तैनाती हो। लोगों का कहना है कि हर साल गंगा घाटों पर हादसे होते हैं, लेकिन प्रशासन सिर्फ घटना के बाद सक्रिय नजर आता है।थानाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार बैठा ने बताया कि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर शव बरामद किया है। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं अंचलाधिकारी खुश्बू खातून ने कहा कि आपदा प्रबंधन राहत कोष से पीड़ित परिवार को सहायता राशि दी जाएगी।नैनीजोर बिहार घाट की यह घटना एक बार फिर यह सवाल छोड़ गई है कि आखिर कब तक गंगा के खतरनाक घाट लोगों की जिंदगी निगलते रहेंगे।

