जनता की इच्छा पर सत्ता का बुलडोजर चलाया गया, डुमरांव का चुनाव भी निष्पक्ष नहीं - पूर्व विधायक

डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजित कुमार सिंह ने एक बार फिर सरकार और चुनाव आयोग पर करारा हमला बोलते हुए बिहार की चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार किस प्रकार छल और बल के सहारे बनी है, इसका प्रमाण खुद पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी समय-समय पर दे रहे हैं।

जनता की इच्छा पर सत्ता का बुलडोजर चलाया गया, डुमरांव का चुनाव भी निष्पक्ष नहीं - पूर्व विधायक

-- पूर्व विधायक ने कहा-छल-बल से बनी सरकार, डुमरांव सहित पूरे बिहार में लोकतंत्र की हत्या

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजित कुमार सिंह ने एक बार फिर सरकार और चुनाव आयोग पर करारा हमला बोलते हुए बिहार की चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार किस प्रकार छल और बल के सहारे बनी है, इसका प्रमाण खुद पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी समय-समय पर दे रहे हैं। यह किसी विपक्षी नेता का आरोप भर नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर से उठती वह आवाज है जो लोकतंत्र की सच्चाई उजागर कर रही है। पूर्व विधायक ने सीधा सवाल किया कि आखिर बिहार की कौन-सी विधानसभा में निष्पक्ष चुनाव हुआ है। क्या डुमरांव का चुनाव निष्पक्ष था? उन्होंने आरोप लगाया कि सामंतवादी ताकतों ने पूंजीवादी व्यवस्था को मजबूत करते हुए धनबल और दबाव के जरिए चुनाव को प्रभावित किया और जनमत को कुचल दिया।

-- हमने सिर्फ विकासवाद को बढ़ावा दिया - पूर्व विधायक

पूर्व विधायक डॉ अजित कुमार सिंह ने कहा कि डुमरांव की जनता किसे चाहती थी, यह पूरे क्षेत्र को भली-भांति मालूम है, लेकिन जनता की इच्छा पर सत्ता का बुलडोजर चला दिया गया। पूर्व विधायक ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा राजनीति को विकास से जोड़ा। मेडिकल कॉलेज, बाईपास सड़क, रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), डिग्री कॉलेज जैसी योजनाओं को धरातल पर लाने के लिए लगातार प्रयास किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी राजनीति का केंद्र बिंदु विकास रहा, न कि जाति, धर्म या नफरत। यही वजह है कि भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता भले ही उनका राजनीतिक विरोध करें, लेकिन उनके द्वारा की गई अनुशंसाओं की सराहना सत्ताधारी दल के कई कार्यकर्ता भी करते रहे हैं।

-- आज डुमरांव में गरीबों की सुनने वाला कौन 

पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि उनकी पृष्ठभूमि गरीबों के बीच से रही है। उन्होंने गरीबी को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि जिया है। इसी कारण वे जनता के दर्द को बेहतर समझते हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने किसी भी गरीब का घर उजड़ने नहीं दिया। आज की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि अब हालात बिल्कुल उलट हैं। डुमरांव में सत्ताधारी पक्ष की तरफ से गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं बचा है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि आज गरीब लोगों की आवाज कौन सुनेगा? जिनके नाम पर लोकतंत्र का ढोल पीटा जाता है, वही आज सबसे ज्यादा उपेक्षित हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि जनता सब देख रही है। लोकतंत्र को छल-बल से ज्यादा दिन तक दबाया नहीं जा सकता। जब जनता का सब्र टूटेगा, तब सत्ता के महलों की नींव हिलना तय है। गरीबों की उपेक्षा के खिलाफ हमारा संघर्ष जारी रहेगा।